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समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्द को हटाने की मांग
सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका में संविधान (42वां संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान की प्रस्तावना में पेश किये गये समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता शब्दों को हटाने के लिए SC से एक आदेश जारी करने मांग की गयी है. इस क्रम में याचिका में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के सब सेक्शन 5 को रद्द करने के लिए निर्देश देने की भी गुहार लगायी गयी है. याचिका में किसी भी राजनीतिक दल को समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के सिद्धांतों के प्रति निष्ठा रखने की आवश्यकता की बात कही गई है. स्वामी की याचिका को लेकर सांसद विश्वम ने अधिवक्ता श्रीराम परकट के माध्यम से दायर अपने आवेदन में कहा, हर पार्टी चुनाव लड़ रही है और अपने सभी उम्मीदवारों के लिए एक समान चुनाव चिह्न की मांग कर रही हैं. ऐसा आवेदन करते समय, संघ या निकाय को दूसरों के बीच समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के सिद्धांतों के प्रति अपनी आस्था और निष्ठा की पुष्टि करनी होती है. विश्वम के अनुसार धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद संविधान की अंतर्निहित और बुनियादी विशेषताएं हैं. याचिकाकर्ता (सुब्रमण्यम स्वामी) की मंशा धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद को पीछे छोड़ते हुए भारतीय राजनीति पर एक स्वतंत्र शासन करना है. विश्वम ने SC से राष्ट्र के संवैधानिक लोकाचार को फिर से लिखने की इस तरह की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की मांग की है. इसे भी पढ़े : कश्मीर">https://lagatar.in/kashmir-dispute-50-thousand-fine-on-petition-seeking-implementation-of-manmohan-musharraf-formula-in-supreme-court/">कश्मीरविवाद : सुप्रीम कोर्ट में दायर मनमोहन-मुशर्रफ फॉर्म्युला लागू करने की मांग वाली याचिका पर 50 हजार का जुर्माना [wpse_comments_template]











































































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