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सीपीआईएमएल नेता कविता कृष्णन ने पार्टी के सभी पद छोड़े, रूस और चीन पर सवाल दागे, मतभेद उजागर

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NewDelhi : सीपीआई (एमएल) लिबरेशन पार्टी के एक प्रमुख चेहरे कविता कृष्णन द्वारा पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिये जाने की खबर है. बता दें कि पोलित ब्यूरो की सदस्य कविता कृष्णन दो दशकों से अधिक समय तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन की केंद्रीय समिति की सदस्य थीं. उन्होंने शुक्रवार को कहा कि उनके अनुरोध पर पार्टी ने उन्हें सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है.

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alt="" width="702" height="501" />पार्टी सेंट्रल कमेटी ने मेरे अनुरोध पर सहमति जताई

कविता कृष्णन फेसबुक पर इसकी घोषणा करते हुए लिखा, मैंने सीपीआईएमएल में अपने पदों और जिम्मेदारियों से मुक्त होने का अनुरोध किया था क्योंकि मुझे कुछ परेशान करने वाले राजनीतिक सवाल पूछने की जरूरत थी. कहा कि यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिनको उठाना सीपीआईएमएल नेता के रूप में मेरी जिम्मेदारियों में रहते हुए संभव नहीं था. पार्टी सेंट्रल कमेटी ने मेरे अनुरोध पर सहमति जताई है. इसे भी पढ़ें : आप">https://lagatar.in/aap-mla-seven-bjp-mla-on-six-september-will-meet-president-draupadi-murmu-will-complain-to-each-other/">आप

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कविता कृष्णन के सवाल कम्युनिस्ट पार्टी को रास नहीं आये

बता दें कि उन्होंने हाल ही में यूक्रेन-रूस संघर्ष पर ट्वीट कर कहा था कि समाजवादी शासन संसदीय लोकतंत्रों से कहीं अधिक निरंकुश शासन थे. कहा जा रहा है कि कविता कृष्णन के ये सवाल कम्युनिस्ट पार्टी को रास नहीं आये. क्योंकि सीपीआई (एमएल) लिबरेशन यकीनी तौर पर दुनिया में समाजवादी शासन चाहती है. कम्युनिस्ट पार्टी कथित तौर पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) जैसी कम्युनिस्ट पार्टियों से प्रेरणा लेती है. इसलिए कविता कृष्णन का कम्युनिस्ट सरकारों से सवाल पूछना उनकी पार्टी को पसंद नहीं आया. इसे भी पढ़ें : महंगाई,">https://lagatar.in/congress-rally-on-sunday-at-ramlila-maidan-against-inflation-gst-unemployment/">महंगाई,

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कविता कृष्णन  ट्विटर पर भी पार्टी का प्रमुख मुखर चेहरा रही हैं

जान लें कि कविता कृष्णन टीवी के अलावा ट्विटर पर भी पार्टी का प्रमुख मुखर चेहरा रही हैं. उन्होंने कहा कि वे अब अपनी लेखनी के माध्यम से सवाल उठायेंगी, क्योंकि अगर वह पार्टी के पदों पर रहीं तो वह ऐसा नहीं कर सकती थीं. उन्होंने फेसबुक पर लिखा, यह पहचानने की जरूरत है कि सोवियत संघ के दौरान स्टालिन के शासन की या फिर विफल चीनी समाजवाद की चर्चा करना अब पर्याप्त नहीं है, बल्कि वे दुनिया के कुछ सबसे खराब सत्तावादी थे जो हर जगह सत्तावादी शासन के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर रहे हैं. जुलाई में, उन्होंने कहा था कि स्टालिन के तहत सोवियत संघ (यूएसएसआर) का औद्योगीकरण यूक्रेन के किसानों को हिंसक रूप से गुलाम बनाकर किया गया था.

कविता कृष्णन ने अपने सवालों की एक लंबी सूची जारी की

कविता कृष्णन ने पार्टी के सभी पदों को छोड़ने के बाद अपने सवालों की एक लंबी सूची जारी की है. उन्होंने लिखा है कि न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में सत्तावादी और बहुसंख्यक लोकलुभावनवाद के बढ़ते रूपों के खिलाफ उदार लोकतंत्रों को उनकी सभी खामियों के साथ बचाव के महत्व को पहचानने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि भारत में फासीवाद और बढ़ते अधिनायकवाद के खिलाफ लोकतंत्र के लिए हमारी लड़ाई सुसंगत होने इसके लिए हमें अतीत और वर्तमान के समाजवादी अधिनायकवादी शासन के विषयों सहित दुनिया भर के सभी लोगों के लिए समान लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता के अधिकार को स्वीकार करना चाहिए. [wpse_comments_template]
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