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झारखंड में 6.30 लाख अपात्र राशन लाभुकों पर शिकंजा, 1.63 लाख कार्ड अब तक रद्द

Ranchi News : राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राशन का लाभ लेने वाले अपात्र लोगों की पहचान के बाद झारखंड सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है. राज्य में जांच के दौरान 6,29,973 लाभुकों को अपात्र पाया गया है. इनमें से अब तक करीब 1.63 लाख यानी 26 प्रतिशत लाभुकों के राशन कार्ड से नाम हटाए जा चुके हैं, जबकि लगभग 4.66 लाख मामलों में कार्रवाई बाकी है.
 
प्रतीकात्मक चित्र

Ranchi News : राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राशन का लाभ लेने वाले अपात्र लोगों की पहचान के बाद झारखंड सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है. राज्य में जांच के दौरान 6,29,973 लाभुकों को अपात्र पाया गया है. इनमें से अब तक करीब 1.63 लाख यानी 26 प्रतिशत लाभुकों के राशन कार्ड से नाम हटाए जा चुके हैं, जबकि लगभग 4.66 लाख मामलों में कार्रवाई बाकी है.

 

खाद्य आपूर्ति विभाग ने सभी जिलों के प्रशासन को अपात्र लाभुकों के खिलाफ कार्रवाई जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है. राज्य सरकार ने इसके लिए 25 अगस्त तक की समय-सीमा तय की है. वहीं, केंद्र सरकार ने 31 अगस्त तक अपात्र नामों को राशन कार्ड की सूची से हटाने को कहा है. निर्धारित अवधि में कार्रवाई पूरी नहीं होने पर राज्य के खाद्यान्न आवंटन पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है.

 

रांची में सबसे ज्यादा अपात्र लाभुक

केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग से प्राप्त आंकड़ों में रांची जिला अपात्र राशन लाभुकों के मामले में सबसे ऊपर है. यहां 93,198 लाभुक जांच में अपात्र मिले हैं. इसके बाद रामगढ़ में 73,567, धनबाद में 67,288 और पूर्वी सिंहभूम में 58,492 लोगों की पहचान हुई है.

 

गिरिडीह में 53,996 और गोड्डा में 45,605 अपात्र लाभुक पाए गए हैं. वहीं, बोकारो में 32,577, चतरा में 14,540, गढ़वा में 24,757, देवघर में 8,117, गुमला में 7,496, दुमका में 10,676, हजारीबाग में 23,884 और जामताड़ा में 24,119 लाभुकों को अपात्र चिन्हित किया गया है.

 

सरकारी कर्मचारी से लेकर आयकरदाता तक शामिल

जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें आर्थिक रूप से सक्षम या निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने वाले लोग भी सरकारी राशन का लाभ ले रहे थे. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 1,272 सरकारी कर्मचारी, 1,84,810 आयकरदाता और 15,493 बड़े कारोबारी राशन योजना के लाभार्थी पाए गए हैं.

 

इसके अलावा 13,087 कंपनी मालिक, 21,442 चारपहिया वाहन मालिक और 1,10,142 डुप्लीकेट राशन कार्डधारक भी जांच में सामने आए हैं. वहीं, छह महीने या उससे अधिक समय से राशन नहीं उठाने वाले 1,77,751 लाभुकों को भी अपात्र श्रेणी में रखा गया है.

 

डिजिटल डाटा से हो रही लाभुकों की जांच

अपात्र लाभुकों की पहचान के लिए केंद्र और राज्य सरकार के अलग-अलग डिजिटल डाटाबेस का मिलान किया जा रहा है. NFSA-2 व्यवस्था के तहत लाभुकों की जानकारी का डिजिटल सत्यापन कर पात्रता की जांच की जा रही है. इसी प्रक्रिया में सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता, वाहन मालिक, डुप्लीकेट कार्ड और अन्य श्रेणियों के लाभुकों की पहचान हुई है.

 

केंद्र के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने Rightful Targeting के तहत झारखंड में चिन्हित 6,29,973 अपात्र लाभुकों के नाम राशन व्यवस्था से हटाने का निर्देश दिया है. इसके बाद राज्य के खाद्य आपूर्ति विभाग ने सभी उपायुक्तों को समय सीमा के भीतर सत्यापन और कार्रवाई पूरी करने को कहा है.

 

31 अगस्त तक केंद्र की डेडलाइन

राज्य स्तर पर कार्रवाई पूरी करने के लिए 25 अगस्त की समय-सीमा तय की गई है, जबकि केंद्र ने पूरी प्रक्रिया 31 अगस्त तक समाप्त करने को कहा है. सरकार का फोकस ऐसे लाभुकों को राशन व्यवस्था से हटाने पर है, जो निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा नहीं करते हैं, ताकि सरकारी खाद्यान्न का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया जा सके.

 

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