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सीयूजे के पूर्व छात्र मोहम्मद रुस्तम का यूके के शिवनिंग स्कॉलरशिप में हुआ चयन

झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) के पूर्व छात्र मोहम्मद रुस्तम का चयन यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित शिवनिंग स्कॉलरशिप के लिए हुआ है. यह स्कॉलरशिप उन्हें लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) में एमएससी इंटरनेशनल सोशल एंड पब्लिक पॉलिसी प्रोग्राम में उच्च शिक्षा के लिए प्रदान की गई है.
 

Ranchi :  झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) के पूर्व छात्र मोहम्मद रुस्तम का चयन यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित शिवनिंग स्कॉलरशिप के लिए हुआ है. यह स्कॉलरशिप उन्हें लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) में एमएससी इंटरनेशनल सोशल एंड पब्लिक पॉलिसी प्रोग्राम में उच्च शिक्षा के लिए प्रदान की गई है.

 

मोहम्मद रुस्तम ने सीयूजे के इंटीग्रेटेड एम.टेक इन एनर्जी इंजीनियरिंग कार्यक्रम से अपनी पढ़ाई पूरी की है. इस वर्ष वे उन चुनिंदा छात्रों में शामिल हुए हैं, जिन्हें दुनिया भर से केवल तीन प्रतिशत छात्रों को ही यह स्कॉलरशिप प्राप्त होती है. यह छात्रवृत्ति भविष्य के लीडर्स को एक वर्ष के ग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए दी जाती है, जो उन्हें शैक्षणिक दृष्टि से सशक्त बनाने के साथ-साथ नेतृत्व कौशल भी प्रदान करती है.

 

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) विश्व के प्रमुख सोशल साइंस संस्थानों में से एक है. क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2025 के अनुसार, इस संस्थान का सोशल पॉलिसी एंड एडमिनिस्ट्रेशन प्रोग्राम विश्व में पहले स्थान पर है. यह प्रोग्राम वैश्विक सामाजिक और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में कार्य करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक आदर्श मंच माना जाता है.

 

सीयूजे के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास ने मोहम्मद रुस्तम को बधाई देते हुए कहा, “रुस्तम ने अपनी कठिन मेहनत और समर्पण से विश्वविद्यालय और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है. उनका चयन यह प्रमाणित करता है कि हमारे विश्वविद्यालय के छात्र वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं.

 

एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजय कुमार समदर्शी ने भी मोहम्मद रुस्तम की सफलता की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं दीं. वहीं, डॉ. भास्कर सिंह, पूर्व छात्र प्रकोष्ठ के अधिष्ठाता, ने भी रुस्तम को बधाई देते हुए कहा कि रुस्तम हमारे विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत हैं.मोहम्मद रुस्तम की इस उपलब्धि ने न केवल झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय को गौरवान्वित किया है, बल्कि उन तमाम छात्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है, जो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखते हैं.

 

 

 


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