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संघर्षों की उपज हैं दयामनी बारला,जानें ग्रामीण क्यों कर रहे उम्मीदवारी की वकालत

Khunti : झारखंड के अरहारा में मुंडा आदिवासी परिवार में जन्मी दयामनी बारला अपने संघर्षों के दम पर देशभर में अपनी पहचान रखती हैं. कोयलकारो परियोजना, खतियानी नीति, मित्तल स्टील प्लांट, सीएनटी संशोधन के खिलाफ हुए आंदोलन, आदिवासी जमीन की हेराफेरी के खिलाफ हुए आंदोलनों में दयामनी बारला ने सक्रिए भूमिका निभाई है. वे जल-जंगल-जमीन पर आदिवासी समुदाय के हक की जोरदार वकालत करती हैं. इनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि खूंटी-गुमला रही है. दयामनी को विरासत में राजनीति नहीं मिली. अपने संघर्षों के दम पर ये राजनीतिक पहचान बनाने में जुटी हैं. यही वजह है कि खूंटी की जनता उन्हें लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारी पेश करते देखना चाहती है. यह जानते हुए भी कि दयामनी बारला और उनके पति एक छोटी सी चाय की दुकान से परिवार की गाड़ी खींचते हैं और लोगों की समस्याओं का निदान करते हैं. इसमें खुद के पैसे भी लगाते हैं. फिलहाल दयामनी कांग्रेस की नेता हैं. इसे भी पढ़ें - एसबीआई">https://lagatar.in/sbi-told-supreme-court-provided-complete-details-of-electoral-bonds-to-election-commission/">एसबीआई

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दयामनी की उम्मीदवारी पर क्या कहती है खूंटी की जनता

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alt="" width="600" height="400" /> झारखंड पार्टी (एनोस गुट) के मनोहर कुल्लू का कहना है कि अगर महागठबंधन की तरफ से दयामनी बारला को खूंटी से कांग्रेस प्रत्याशी बनाया जाएगा तो झारखंड पार्टी कांग्रेस को समर्थन दे सकती है. राज्य में निःस्वार्थ भाव से किए गये कामों के कारण ही लोग दयामनी को पंसद करते हैं. कोलेबिरा के झारखंड पार्टी समर्थक जसिन केरकेट्टा का कहना है कि ये लोग या तो बारला को वोट करेंगे, नहीं तो झारखंड पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में जाएंगे. गोस्सनर डांग और निशांत रमण ने भी कहा कि दयामनी को राजनीति विरासत में नहीं मिली है, उनके संघर्षों के कारण लोग उन्हें अपना अगुवा मानते हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/03/beni.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> बुंडू के सामाजिक कार्यकर्ता बेनी महतो ने कहा कि उनके क्षेत्र के कुर्मी वोटर में अर्जुन मुंडा और कालीचरण सिंह मुंडा दोनों को लेकर नाराजगी है. अगर कांग्रेस किसी दमदार और जमीन से जुड़े व्यक्ति को उम्मीदवार बनाएगा तो कुड़मी समाज का उसे समर्थन मिलेगा. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/03/pramod1.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> बनो के प्रमोद लुगुन कहते हैं कि खूंटी को आदिवासियों को मिले संवैधानिक अधिकार को लागू करने वाला नेता चाहिए. साथ ही कहा,मूलवासियों को भी साथ लेकर चला जा सके, ये सिर्फ दयामनी ही कर सकती हैं. अखिल भारतीय सरना समाज के सेलाएचंद्र मुंडा का कहना है कि ये लोग झारखंड खतियानी पार्टी(जयराम महतो) की तरफ से खूंटी लोकसभा में उम्मीदवार देंगे. यदि दयामनी बारला भी चुनाव लड़ेंगी, उस स्थिति में संगठन के लोग दयामनी को सर्पोट करेंगे. इसे भी पढ़ें - रिजर्व">https://lagatar.in/many-mistakes-in-jpsc-question-paper-candidates-came-to-meet-cm/">रिजर्व

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