New Delhi: आदिवासी धर्म कॉलम की मांग को लेकर राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति भारत का बैठक हुआ. जहां विभिन्न राज्यों के आदिवासी प्रतिनिधियों ने कोर कमेटी बनाई है. यह कमेटी दो दिवसीय 29 और 30 अगस्त की बैठक के उपरांत दिल्ली स्थित अंबेडकर भवन में बनाया गया. इसमें झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और असम समेत विभिन्न राज्यों से आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
इसे भी पढ़ें:
बैठक में आदिवासी धर्म को जनगणना में अलग से दर्ज करने की मांग उठाई जाएगी. इसके साथ ही आगे की रणनीति पर चर्चा की गई. समिति ने संगठन को राज्य और जिला स्तर तक मजबूत करने पर बल दिया. आदिवासी धर्म कॉलम मांग को देशभर में जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया.
बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी राज्यों से विभिन्न आदिवासी समुदायों और संगठनों के 11-11 लोगों के नाम 7 सितंबर तक मांगे गए.वहीं, सभी जिलों में 30 सितंबर तक कोर कमेटी गठित करने का लक्ष्य रखा गया है.धान ने बताया कि कोर कमेटी के 75 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति में ही कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकेगा.
समिति ने आगामी जनगणना में आदिवासी धर्म दर्ज कराने को लेकर व्यापक अभियान चलाने का फैसला किया है. बैठक में 15 करोड़ आदिवासियों द्वारा जनगणना में आदिवासी धर्म लिखने का लक्ष्य रखा गया.
धर्म कॉलम की मांग को लेकर 1 दिसंबर से 15 दिसंबर तक नासिक से दिल्ली तक पदयात्रा निकालने का निर्णय लिया गया. पदयात्रा के समापन पर 15 दिसंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर रैली आयोजित करने की घोषणा की गई.
इसके अलावा 20 दिसंबर से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में आदिवासी धर्म कॉलम को लेकर जागरूकता रथ निकालने का निर्णय लिया गया है.
बैठक में पूर्व मंत्री देव कुमार धान, पूर्व मंत्री गीता श्री उरांव, प्रेमशाही मुंडा, अभय भुट्ट, कुंवर चंदन होनहागा, दिनेश भूमिज, अमरनाथ खरवार, गणेश पाट पिगुआ, गब्बर सिंह हेमरोम, मसूदी टुडू और सुलेमान हांसदा समेत कई प्रतिनिधि शामिल हुए.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

