Ranchi News: एप आधारित टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े गिग वर्कर्स के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के लिए लंबे समय से सक्रिय सुरेंद्र सिंह ने झारखंड में ड्राइवरों के हित में कई महत्वपूर्ण पहल की है. ओला, उबर, रैपिडो और स्विगी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स को कानूनी सुरक्षा दिलाने की दिशा में उन्होंने झारखंड प्रदेश टैक्सी-आधारित वर्कर यूनियन के माध्यम से लगातार आवाज उठाई.
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सुरेंद्र सिंह के प्रयासों में झारखंड में गिग वर्कर्स (पंजीकरण और कल्याण) कानून लागू कराने की पहल शामिल है. उनका कहना है कि ऐप आधारित काम करने वाले हजारों ड्राइवर और डिलीवरी पार्टनर्स लंबे समय तक सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर रहे. यूनियन के माध्यम से सरकार के समक्ष उनकी समस्याओं को लगातार उठाया गया. कानूनी सुरक्षा का दायरा बढ़ने से गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा, बीमा, आय से जुड़ी सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच का रास्ता तैयार हुआ है.
ड्राइवरों को प्लेटफॉर्म कंपनियों पर निर्भरता से बाहर निकालने के उद्देश्य से सुरेंद्र सिंह ने भारत टैक्सी जैसी सहकारी पहल को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई. उनके साथ विभिन्न यूनियनों से जुड़े लोगों ने भी इस पहल में सहयोग किया. इस मॉडल का उद्देश्य टैक्सी सेवा को सहकारी व्यवस्था के तहत संचालित करना है, ताकि किराये से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा सीधे वाहन चलाने वाले ड्राइवरों तक पहुंचे.
सुरेंद्र सिंह ने बताया कि ड्राइवरों के हित में काम करना उनके लिए व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा है. उन्होंने झारखंड प्रदेश टैक्सी ऐप-आधारित वर्कर यूनियन के माध्यम से ड्राइवरों को जागरूक करने, उनकी समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए निःशुल्क काम किया.
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