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JTET में झारखंडी भाषाओं को प्राथमिकता देने की मांग तेज, मंत्री योगेंद्र प्रसाद से मिला प्रतिनिधिमंडल

Ranchi : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में झारखंडी भाषाओं को प्राथमिकता देने और भोजपुरी, मगही, अंगिका, मैथिली, उड़िया, बांग्ला और उर्दू जैसी भाषाओं को विषय सूची से हटाने की मांग को लेकर शुक्रवार को रांची स्मार्ट सिटी स्थित मंत्री योगेंद्र प्रसाद के आवास पर बैठक हुई.

 

बैठक में खोरठा साहित्य संस्कृति परिषद् के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. बी.एन. ओहदार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से मुलाकात की. इस दौरान राधा गोबिंद विश्वविद्यालय के खोरठा विभागाध्यक्ष अनाम ओहदार, दुबराज महतो, अधिवक्ता विक्की कुमार साव समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे.

 

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि झारखंड राज्य का गठन सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के आधार पर हुआ है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं में स्थानीय और जनजातीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि पलामू क्षेत्र की मूल भाषा ‘पलमुआ’ है, जो खोरठा और नागपुरी से प्रभावित है.

 

बैठक में यह भी कहा गया कि झारखंड आंदोलन में भोजपुरी, मगही और अंगिका की कोई भूमिका नहीं रही और राज्य में इन भाषाओं की उल्लेखनीय साहित्यिक गतिविधियां भी नहीं हैं. प्रतिनिधियों ने यह भी तर्क दिया कि बिहार में भी इन भाषाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में विशेष स्थान नहीं मिला है.

 

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कुछ लोग केवल परीक्षाओं के समय भाषा विवाद खड़ा कर नियुक्ति और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि पलामू प्रमंडल के बड़ी संख्या में छात्र JPSC, JSSC और JAC की परीक्षाओं में खोरठा को भाषा विकल्प के रूप में चुनते हैं. मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि उनके सुझावों को उच्च स्तरीय समिति के समक्ष रखा जाएगा.

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