Deoghar : श्रावणी मेले में बाबा बैद्यनाथ धाम से आस्था और रिश्तों की खूबसूरत तस्वीरें सामने आ रही हैं. कांवरिया पथ से लेकर मंदिर परिसर तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच एक पिता अपने छोटे बेटे को कंधे पर बिठाकर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कराते नजर आए. पिता के इस समर्पण और वात्सल्य ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा.
मंदिर परिसर और कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ होती है. छोटे बच्चों को पैरों तले कुचलने या खो जाने के डर से बचाने के लिए पिता उन्हें अपने मजबूत कंधों का सहारा देते हैंमाता-पिता जब छोटी उम्र में ही बच्चों को धार्मिक स्थलों की यात्रा पर लेकर जाते हैं, तो उन्हें अपनी संस्कृति, परंपराओं और आस्था को करीब से समझने का अवसर मिलता है. ऐसी यात्राएं बच्चों के मन में बचपन से ही धार्मिक और सांस्कृतिक संस्कारों की नींव मजबूत करती हैं.
कांवरिया यात्रा और श्रावणी मेले में केवल पिता-पुत्र ही नहीं, बल्कि आधुनिक युग के कई 'श्रवण कुमार' भी देखने को मिलते हैं जो अपने बूढ़े माता-पिता को बहंगी या कांवर में बैठाकर सुल्तानगंज से देवघर तक की कठिन पैदल यात्रा पूरी करते हैं.
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