- टेंडर के पेंच में तीन सालों से दम तोड़ रही मुफ्त साइकिल वितरण योजना
- कैबिनेट स्वीकृति के एक साल बाद भी बच्चों को नहीं मिल पाया टैब
- तीन सालों में एसटी, एससी, ओबीसी, अल्पसंख्यकों को साइकिल नहीं दे पाया कल्याण विभाग.
- 2020-21 में कक्षा 8 के बच्चे अब 2022-23 में पहुंच गए कक्षा 10 में.
- 2021-22 में कक्षा 8 में पढ़ने वाले बच्चे अब पहुंच गए कक्षा 9 में.
- हर वित्तीय वर्ष में 2 लाख स्कूली बच्चों को मिलना था साइकिल, वंचित रह गए करीब 6 लाख बच्चे.
- वित्तीय वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में किया गया क्रमशः 122 करोड़ रुपए का प्रावधान, यानी कुल राशि 366 करोड़ पीएल खाते में जमा है.
- कल्याण विभाग के 136 आवासीय विद्यालयों के 21,000 बच्चों को मोबाइल टैब देने की योजना भी अधर में.
- टैब के साथ सिम कार्ड एवं 12 माह का डाटा रिचार्ज देने का जनवरी 2022 की कैबिनेट में हुआ था फैसला.
- रांची जिले में 9 आवासीय विद्यालयों के 2096 छात्र छात्राओं को मिलना है मोबाइल टैब.
20-21 और 21-22 में नहीं मिल पाया साइकिल, 22-23 खत्म होने को बचे हैं तीन माह
मुफ्त साइकिल देने की योजना एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों के लिए है. 2020 से ही कल्याण विभाग अंतर्गत संचालित योजना का लाभ सरकारी स्कूल के बच्चों को नहीं मिल पाया. वित्तीय वर्ष 2020-2021 में कक्षा आठ में पढ़ रहे बच्चों को साइकिल दी जानी थी. जिन विद्यार्थियों को यह साइकिल दी जानी थी, वह अब कक्षा दस में पहुंच गए हैं. वित्तीय वर्ष में 2021-2022 में कक्षा आठ में पढ़ रहे विद्यार्थी अब कक्षा नौ में पहुंच गए हैं. वित्तीय वर्ष 2022-2023 खत्म होने को महज तीन माह ही शेष बचे हैं, लेकिन विभाग के स्तर पर टेंडर को लेकर कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गयी है. इसे भी पढ़ें- कोर्ट">https://lagatar.in/council-members-met-the-governor-regarding-amendment-in-court-fees-got-assurance-of-positive-initiative/">कोर्टफीस में संशोधन को लेकर राज्यपाल से मिले काउंसिल के सदस्य, मिला साकारात्मक पहल का आश्वासन
6 लाख बच्चे वंचित हुए योजना के लाभ से, पीएल खाते में जमा हुए 366 करोड़
हर वित्तीय वर्ष में करीब 2 लाख बच्चों को साइकिल दी जानी थी. यानी कुल मिलाकर करीब 6 लाख बच्चे इस योजना से वंचित हो गए हैं. प्रत्येक वित्तीय वर्ष में साइकिल के लिए 122 करोड़ रुपये का प्रावधान हुआ. तीन वर्षों को मिलाकर अब यह राशि 366 करोड़ रुपये हो गई है. राशि पीएल खाते में ट्रांसफर की गयी थी. 5 दिसंबर 2022 को कल्याण विभाग ने संकल्प जारी कर कहा कि कक्षा 8, 9 और 10 में पहुंच गए विद्यार्थियों को पीएल खाते में जमा राशि से साइकिल दी जाएगी.पूरा खेल टेंडर का, हर बार कोहिनूर कंपनी के आने से फंसा पेंच
पूर्व की रघुवर सरकार में एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक बच्चों को साइकिल के लिए प्रत्येक विद्यार्थी डीबीटी के माध्यम से 3500 रुपये राशि दी जाती थी. हेमंत सरकार ने योजना में बदलाव करते हुए विद्यार्थियों को साइकिल देने का फैसला किया. इसके लिए टेंडर निकाला जाना था. वित्तीय वर्ष 2020 में कोरोना के कारण टेंडर वितरण नहीं हो पाया. कल्याण विभाग के मुताबिक, पूरा खेल टेंडर का है. टेंडर में साइकिल की अधिकतम राशि 4500 रुपये तय की गयी. दो बार टेंडर जारी भी हुआ, लेकिन हर बार कोहिनूर नाम की ही कंपनी टेंडर में भाग ली. इससे टेंडर प्रक्रिया पूरी ही नहीं हो पायी.कैबिनेट स्वीकृति के एक साल बाद भी नहीं मिल पाया 21000 बच्चों को टैब
22 जनवरी 2022 को हुई हेमंत कैबिनेट की बैठक में फैसला हुआ था कि कल्याण विभाग अंतर्गत चल रही 136 आवासीय विद्यालयों के 21,000 बच्चों को राज्य सरकार मुफ्त में टैब देगी. इसके लिए सरकार कुल 26.25 करोड़ रुपये खर्च करेगी. कैबिनेट स्वीकृति के एक साल बाद भी बच्चों को टैब नहीं मिल पाया है. रांची जिला कल्याण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार और कल्याण विभाग के द्वारा अब तक कागजी तौर पर इस योजना को लेकर कोई दिशा निर्देश नहीं मिला है. इसे भी पढ़ें- पलामू">https://lagatar.in/action-on-illegal-mining-in-palamu-58-firs-in-two-years-20-crushers-demolished-1-crore-38-lakh-fine-recovered/">पलामूमें अवैध खनन पर कार्रवाई, दो साल में 58 FIR, 20 क्रशर ध्वस्त, 1.38 करोड़ वसूला गया जुर्माना

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