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विभागीय विफलता और लापरवाहीः झारखंड में शीतागार परियोजना बनी सफेद हाथी

झारखंड राज्य कृषि विपणन पार्षद (जेएसएएमबी) द्वारा किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक भंडारण सुविधा देने के लिए कोल्ड स्टोर परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई है. जनवरी और जून 2014 के बीच 3.67 करोड़ की लागत से निर्मित 16 शीतागार और आज तक चालू नहीं हो पाई हैं.
 
  • 3.67 करोड़ की लागत से बनी 16 इकाइयां नौ साल से बेकार, किसानों को नहीं मिला लाभ

 

Ranchi : झारखंड राज्य कृषि विपणन पार्षद (जेएसएएमबी) द्वारा किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक भंडारण सुविधा देने के लिए कोल्ड स्टोर परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई है. जनवरी और जून 2014 के बीच 3.67 करोड़ की लागत से निर्मित 16 शीतागार और आज तक चालू नहीं हो पाई हैं.

 

मार्च 2001 में स्थापित जेएसएएमबी का उद्देश्य कृषि उत्पाद बाजार समितियों (एपीएमसी) के माध्यम से किसानों को बेहतर विक्री सुविधाएं और उपज उचित मूल्य दिलाना था. इसी कड़ी में कोल्ड स्टोर परियोजना शुरू की गई थी. मई 2010 में 18 इकाइयों के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी, जिनमें से 16 का निर्माण पूरा हो गया, लेकिन दो इकाइयां भूमि विवाद के कारण अधूरी रह गईं.

 

अक्टूबर 2020 से जनवरी 2023 के बीच की गई जांच और भौतिक सत्यापन में सामने आया कि सभी 16 इकाइयां जर्जर और बेकार पड़ी हैं. न तो प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति हुई और न ही संचालन की कोई ठोस व्यवस्था. स्थानीय किसानों ने भी शीतागारों में रुचि नहीं दिखाई और सीधे बाजार में उपज बेचते रहे.

 

2016 में इकाइयों को वेजफेड के जरिए संचालित करने का निर्णय लिया गया, लेकिन एपीएमसी ने संबंधित समितियों को इकाइयां नहीं सौंपी. नतीजा यह हुआ कि वर्षों से उपकरण अनुपयोगी पड़े हैं और करोड़ों रुपये का निवेश का कोई परिणाम अब तक सामने नहीं आया.

 

मार्च 2024 में जेएसएएमबी ने माना कि प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी और संचालन प्रक्रिया में देरी के कारण कोल्ड स्टोरेज का उपयोग नहीं हो सका. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन इकाइयों का सही उपयोग होता तो किसानों को न सिर्फ उपज संरक्षित करने की सुविधा मिलती, बल्कि कृषि उत्पादों का नुकसान भी काफी हद तक कम होता.

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