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मंत्री और गृह सचिव के कहने के बाद भी कार्मिक विभाग ने पुलिसकर्मियों के लिए नहीं खोला HRMS पोर्टल

पुलिसकर्मियों को संपत्ति का ब्योरा देने का मौका मिले, इसके लिए झारखंड पुलिस ने एसोसिएशन ने कई जगह दरवाजा खटखटाया, लेकिन कार्मिक विभाग ने किसी की नहीं सुनीं. यहां तक कि मंत्री और गृह सचिव के कहने पर भी पोर्टल नहीं खोला गया.
 
  • *हर साल जनवरी-फरवरी में एचआरएमएस पोर्टल पर देना होता है संपत्ति का विवरण.
  • *ड्यूटी पर होने के कारण बहुत सारे पुलिसकर्मी पोर्टल पर संपत्ति का ब्योरा नहीं दे सके हैं.
  • *संपत्ति का ब्योरा पोर्टल पर नहीं रहने की वजह से न प्रोन्नति मिलेगी ना एसीपी का लाभ.

Ranchi : झारखंड पुलिस के 300 से अधिक पुलिस पदाधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा ह्यूमन रिसोर्च मैनेजमेंट सिस्टम (एचआरएमएस) यानी झारखंड मानव संपदा पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है. क्योंकि जिस वक्त पोर्टल खुला हुआ था, उस वक्त वह ड्यूटी पर थे. ड्यूटी पर या अभियान में होने की वजह से पुलिसकर्मी जनवरी-फरवरी माह में इस ऑनलाइन पोर्टल पर संपत्ति का ब्योरा नहीं दे सके. 

 

पुलिसकर्मियों को संपत्ति का ब्योरा देने का मौका मिले, इसके लिए झारखंड पुलिस ने एसोसिएशन ने कई जगह दरवाजा खटखटाया, लेकिन कार्मिक विभाग ने किसी की नहीं सुनीं. यहां तक कि मंत्री और गृह सचिव के कहने पर भी पोर्टल नहीं खोला गया.

 

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वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर का कार्मिक सचिव को लिखा पत्र.

 

झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अनुरोध पर राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो को बुलाकर बात की. पत्र भी लिखा. मंत्री ने निर्देश दिया कि एचआरएमएस पोर्टल पर खोलकर पुलिसकर्मियों की समस्या का समाधान किया जाये. अगर इसमें कोई वैधानिक कठिनाई तो 14 अक्टूबर तक लिखित रुप से इसकी जानकारी दें. कार्मिक विभाग की तरफ से मंत्री कार्यालय को कोई जानकारी नहीं मिली. 

 

इससे पहले गृह सचिव वंदना दाडेल ने भी कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो से बात की. जब बात करने के बाद भी इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उनके निर्देश पर गृह विभाग अपर सचिव ने 12 अक्टूबर को एचआरएमएस पोर्टल खोलने के लिए आग्रह किया. लेकिन कार्मिक विभाग ने पोर्टल खोलने को लेकर कोई पहल नहीं की.

 

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गृह विभाग के अपर सचिव द्वारा कार्मिक सचिव को लिखा गया पत्र.

 

उल्लेखनीय है कि पुलिसकर्मियों व पदाधिकारियों को हर साल जनवरी और फरवरी महीने में संपत्ति का ब्योरा ऑनलाइन पोर्टल पर देना होता है. कुछ पुलिसकर्मी जो अभियान में या किसी जरूरी ड्यूटी में थे, वो समय पर पोर्टल पर संपत्ति का ब्योरा नहीं दे पाये. अब उनके सामने समस्या यह है कि जनवरी-फरवरी 2027 में जब पोर्टल खुलेगा तो वह 2026 की संपत्ति का ब्योरा तो दे पाएंगे लेकिन 2025 की संपत्ति का ब्योरा नहीं दे पाएंगे. इस कारण न तो उन्हें प्रोन्नति का लाभ मिलेगा और न ही एसीपी का लाभ मिल पायेगा.

 

पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह न तो किसी वित्तीय अनियमितता का मामला है और न ही इसमें किसी तरह का कोई कानूनी अड़चन है. लेकिन कार्मिक सचिव की जिद के कारण 300 से अधिक पुलिसकर्मियों को यह सब झेलना पड़ेगा. वह अपने बैच में ही जूनियर हो जायेंगे. उन्हें एसीपी का लाभ नहीं मिलेगा, तो आर्थिक नुकसान भी होगा.

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