Dhanbad: धनबाद सिविल सर्जन कार्यालय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, जहां नवोदय और एकलव्य विद्यालय में नामांकन के लिए आवश्यक मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने के बदले कथित रूप से 1500 रुपये घूस मांगने की शिकायत सामने आई है. इसे लेकर गुरुवार को ग्रामीण क्षेत्रों से आए आदिवासी बच्चों और उनके परिजनों ने जिला परिषद सदस्यों के साथ कार्यालय पहुंचकर जमकर विरोध-प्रदर्शन किया.

बताया जा रहा है कि कई आदिवासी बच्चे पिछले पांच दिनों से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सिविल सर्जन कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अब तक उनका मेडिकल परीक्षण तक नहीं किया गया है. आरोप है कि बिना पैसे दिए सर्टिफिकेट नहीं बनाया जा रहा, जिससे बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है.
निरसा की जिला परिषद सदस्य पिंकी मरांडी और पूर्वी टुंडी की जिला परिषद सदस्य जोबा मरांडी ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों से आए गरीब आदिवासी बच्चों से 1500 रुपये की मांग की जा रही है. उन्होंने कहा कि ये बच्चे 5वीं और छठी कक्षा के हैं और उन्हें नवोदय व एकलव्य विद्यालय में नामांकन के लिए 20 अप्रैल तक मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करना अनिवार्य है. यदि समय पर सर्टिफिकेट नहीं मिला तो उनका नामांकन रूक सकता है.
मौके पर मौजूद भाजपा नेता राजीव ओझा ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार आदिवासी हितों की बात करती है लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हीं बच्चों को परेशान किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे के बिना काम नहीं हो रहा जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
वहीं सिविल सर्जन आलोक विश्वकर्मा ने आरोपों को सिरे से खारिज नहीं किया लेकिन स्पष्ट किया कि बच्चों के दस्तावेज जमा कर लिए गए हैं और मेडिकल प्रक्रिया जारी है. उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी बच्चों की जांच पूरी कर सर्टिफिकेट जारी कर दिए जाएंगे.
फिलहाल इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल भ्रष्टाचार का मामला होगा, बल्कि गरीब और आदिवासी बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर अन्याय भी माना जाएगा. ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
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