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धनबाद : कहीं आप भी तो नहीं खरीद रहे नकली शराब, सरकारी दुकानों में खपाये गये करोड़ों के माल!

  • 50 से 60 फीसदी कमीशन पर बेचते हैं सेल्समैन
  • शहरी से अधिक कोलियरी और ग्रामीणों इलाकों में खपा रहे धंधेबाज, मजदूर तबके के लोगों के हाथों में थमाते हैं दुकानदार
  • होली को देखते हुए नकली शराब का ओवरस्टॉक जमा, एक साल में पकड़े गए सात मामले
Dhanbad : होली पर्व के नजदीक आते ही शौकीन के डिमांड को देखते हुए सरकारी दुकानों में अवैध धंधेबाजों की ओर से कोयलांचल में करोड़ों की शराब खपायी गई है. दुकानों के सेल्समैन 50 से 60 फीसदी कमीशन पर शराब बेच रहे हैं. अभी तक एक साल में शहरी, कोलियरी व ग्रामीण इलाके की दुकानों में सात मामले पकड़ में आ चुके हैं, जहां से नकली अंग्रेजी शराब जब्त की गई है. सूत्रों के अनुसार ऐसा नहीं है कि सात मामलों का खुलासा उत्पाद विभाग की ओर से किया गया है. इसे शराब बनाने वाली और सप्लाई करनेवाली कंपनी की संयुक्त टीम ने किया है. उत्पाद विभाग के अधिकारी भले ही दावा करते हैं कि उनकी ओर से बीच-बीच में दुकानों में शराब के स्टॉक के साथ-साथ खरीद बिक्री की जांच की जाती है. एक-दो सरकारी दुकानों के सेल्समैन ही नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं कि उत्पाद विभाग के अधिकारी कभी भी अंग्रेजी शराब की जांच नहीं करते हैं. शहरी से अधिक कोलियरी और ग्रामीणों इलाकों में धंधेबाज काफी मात्रा में शराब खपा रहे हैं. नकली शराब की बोतलें अधिकतर कभी कभार पीने वाले और मजदूर तबके के लोगों के हाथों में ही दुकानदार थमाते हैं, ताकि उन्हें पता न चले. होली में शराब की खरीदारी को लेकर दुकानों में मारामारी होती है. जिसके कारण दुकानदार आसानी से मिलावटी व नकली शराब खपा देते हैं. होली में नियमित पीने वालों की अपेक्षा कभी कभार पीने वाले शौकीन काफी अधिक पीते हैं. घर आए मेहमानों व दोस्तों को पिलाने के लिए भी लोग ओवरस्टॉक जमा कर लेते हैं. एक-दो बोतल की बजाय 5 से 10 बोतले खरीद लेते हैं.

नकली शराब बनानेवाली एक सौ से अधिक है मिनी फैक्ट्री

जानकारों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों के अलावा कोलियरी व ग्रामीण इलाकों में वर्तमान समय में लगभग एक सौ से अधिक मिनी फैक्ट्री है, जहां रोजाना बड़े पैमाने पर नकली व मिलावटी शराब बनायी जाती है. जिला में भले ही सरकारी दुकानों की संख्या 139 है, लेकिन होटलों, राशन दुकानों, झोपड़ी व घरों आदि में अवैध रूप से देसी-विदेशी शराब की बिक्री हजारों जगहों पर होती है. फैक्ट्री में मिथाइल अल्कोहल व स्प्रिट आदि केमिकल से शराब बनती है. ब्रांडेड शराब के रैपर बोतलों पर चिपका देते हैं और उसमें नकली व मिलावटी शराब भर देते हैं. इसके अलावा पुराने बोतलों में भी उसे साफ कर नकली शराब भरकर बेचा जाता है. धंधेबाज बंगाल से खाली बोतल, ब्रांडेड शराब के रैपर, ढक्कन भारी मात्रा में मंगाते हैं और उसमें तैयार किए गए शराब को पैक करते हैं.

ट्रेनों और सड़क मार्ग से नकली शराब भेजी जा रही बिहार

बिहार में शराब बंदी होने के कारण होली पर्व को लेकर डिमांड काफी बढ़ गई है. ट्रेनों और सड़क मार्ग से नकली शराब काफी मात्रा में भेजी जा रही है. ट्रेनों और सड़क मार्ग पर गाड़ियों की नियमित चेकिंग नहीं होने से रोजाना लाखों-करोड़ों की शराब तस्कर बिहार के विभिन्न जिलों में ले जाकर दो से तीन गुना कीमत पर बेच रहे हैं. महुआ शराब भी बिहार भेजी जा रही है. पूर्व में जीटी रोड पर और ट्रेनों में शराब की खेप पकड़ी गई थी, लेकिन पिछले एक साल से छापामारी नहीं हो रही है. रेलवे में कभी कभार आरपीएफ की टीम गंगा-दामोदर, पाटलिपुत्र, मौर्य, गंगा-सतलज, वनांचल, धनबाद-पटना एक्सप्रेस में छापेमारी कर शराब पकड़ चुकी है. इसे भी पढ़ें : Breaking">https://lagatar.in/big-blow-to-jmm-sita-soren-joins-bjp/">Breaking

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