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धनबाद : दलितों- शोषितों को हक दिलाने के लक्ष्य से अब भी दूर है बिहार कोलियरी कामगार यूनियन

Dhanbad : कोयला क्षेत्र में दलित, शोषित, वंचित वर्ग के नाम पर वर्ष 1967 में बिहार कोलियरी कामगार यूनियन का गठन हुआ था. लंबे समय तक यूनियन का वर्चस्व भी रहा, लेकिन दलितों के उत्थान  का लक्ष्य आज भी अधूरा है. यूनियन की बागडोर अभी केंद्रीय अध्यक्ष आनंद महतो और महासचिव हलधर महतो के हाथ में है. श्री महतो दावा करते हैं कि यूनियन जिस विचारधारा के लिये जाना जाता है, उसपर आज भी कायम है. यूनियन कोयला उद्योग के निजीकरण के खिलाफ है.  इसके लिये लगातार लड़ाई भी लड़ रहे हैं. लेकिन केंद्र में जब तक भाजपा की सरकार है मजदूरों का भला नहीं हो सकता. बावजूद हमारी यूनियन ने कमजोर वर्ग को सरकारी और आउटसोर्सिंग कंपनियों में स्थायी नोकरी दिलाने का काम किया है. हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक दलित और कमजोर वर्ग मालिक न बन जाएं.

यूनियन की उत्पत्ति और  इतिहास

यूनियन के महासचिव ने बताया कि मार्क्सिस्ट को-ऑर्डिनेशन कमिटी (mcc या मासस) का गठन 22 अप्रैल 1972 को पटना में हुआ. बिहार कोलियरी कामगार यूनियन इसी पार्टी का जन संगठन है. ‘दुनिया के मजदूरों एक हो’ हमारा नारा है. देश में बहुत सारी कम्युनिस्ट पार्टियां थी. लेकिन सभी वर्ग विशेष और वर्ण विशेष की बात कहती थी. दलितों की बात कोई नहीं करता था. इसीलिए बिहार में मासस का गठन हुआ. इससे पूर्व धनबाद के सिंदरी खाद कारखाना में कमजोर वर्ग के शोषण के खिलाफ आंदोलन शुरू हो चुका था. कामरेड एके राय ने कारखाना की नौकरी छोड़ 1967 में बिहार कोलियरी कामगार यूनियन का गठन किया. इसके अलावा पीबी एरिया में आंदोलन की शुरुआत हुई. एके राय कोयला क्षेत्र में कमजोर वर्ग के मसीहा बनकर उभरे. एके दा का नारा था लूटने वाला जाएगा, कमाने वाला खायेगा, नया जमाना आएगा. आज हमारी यूनियन बीसीसीएल के अलावा ईसीएल और सीसीएल में भी है. बीसीसीएल क्षेत्र के जिला अध्यक्ष बिंदा पासवान हैं तथा सचिव दिलीप महतो. इस क्षेत्र में यूनियन के 15 हजार सदस्य हैं.

   यूनियन की उपलब्धि

सिर्फ धनबाद जिले में बीसीसीएल के 12 एरिया, ईसीएल के मुगमा क्षेत्र सहित इस्को कंपनी के अंतर्गत संचालित कोलियरियों में निजीकरण के खिलाफ लगातार आंदोलन किया जा रहा है. यह लंबे समय से चल रहा है. हालांकि अभी तक सफलता नहीं मिली है. इसके अलावा केंद्र के नए श्रम कानून का भी विरोध कर रहे हैं. पहले कोलियरियों में दलित और कमजोर वर्ग का जमकर शोषण होता था.  माफिया, सूदखोर और महाजन उनका शोषण कर रहे थे. यूनियन ने इसपर अंकुश लगाने का काम किया. इसके बाद कोलियरी क्षेत्र में कमजोर वर्ग को रोजगार गारंटी, जमीन के बदले नियोजन, आउटसोर्सिंग में मजदूरों को स्थायी नौकरी यहां तक कि ट्रक लोडिंग करने वालों को भी स्थायी नौकरी दिलाने का काम किया है.

   आय का स्रोत

हलधर महतो ने बताया कि मेम्बरशिप का पैसा ही यूनियन की आय का स्रोत है. 15 हजार सदस्य हैं. प्रत्येक सदस्य से 100-100 रुपये सालाना मेंबरशिप की राशि ली जाती है. यही सच्चाई है. इसके अलावा संग़ठन का अधिवेशन या कोई बड़ा कार्यक्रम होता है तो सभी मजदूरों से चंदा लिया जाता है. यह भी पढ़ें : निरसा">https://lagatar.in/nirsa-villagers-started-on-their-own-the-water-tower-which-was-closed-for-four-years/">निरसा

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