झामुमो नेताओं का भाजपा पर पलटवार
Dhanbad : धनबाद कोयलांचल में इन दिनों सियासी पारा गर्म है. कोयलांचल की दो प्रमुख समस्याओं एयरपोर्ट निर्माण व भू-धंसान को लेकर बीजेपी व झामुमो के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. जनप्रतिनिधियों के धरना-प्रदर्शन व बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है. सांसद ढुल्लू महतो ने हाल ही में अपने समर्थकों के साथ धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर धरना देकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाया था.
सांसद का कहना है कि राज्य सरकार एयरपोर्ट निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने में जानबूझकर कोताही बरत रही है. इस पर पलटवार करते हुए झामुमो जिला सचिव मन्नू आलम ने इसे कोरी राजनीति करार दिया. सोमवार को सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक केंद्र सरकार या एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की ओर से राज्य सरकार से जमीन की कोई औपचारिक मांग ही नहीं की गई है. बिना मांगपत्र के राज्य सरकार पर आरोप मढ़ना राजनीतिक स्टंट है.
दूसरी ओर धनबाद विधायक राज सिन्हा ने केंदुआडीह में दो दिनों तक धरना देकर शहर की बदहाल स्थिति पर चिंता जताई. विधायक ने कहा कि भू-धंसान के कारण धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग बाधित है. जहरीली गैस के रिसाव से करीब 10 हजार की आबादी खतरे में है, लेकिन राज्य सरकार मूकदर्शक बनी हुई है.
पूर्व मेयर सह झामुमो नेता चंद्रशेखर अग्रवाल ने विधायक के आरोपों का खंडन करते हुए जिम्मेदारी बीसीसीएल (BCCL) पर थोप दी. उन्होंने कहा कि सड़क धंसने के बाद बीसीसीएल ने उसे बंद कर दी है. क्षेत्र में पिछले चार महीनों से जहरीली गैस का रिसाव हो रहा है, जो केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत संस्थानों बीसीसीएल, डीजीएमएस व सिंफर की सीधी जवाबदेही है. विस्थापन और राहत उपायों के लिए इन संस्थानों को तुरंत जांच और कार्रवाई करनी चाहिए न कि इसका दोष राज्य सरकार पर मढ़ना चाहिए.
चंद्रशेखर अग्रवाल ने तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेता अपनी बैटरी डिस्चार्ज होने पर ही धरना-प्रदर्शन के जरिए खुद को चार्ज करने की कोशिश करते हैं. इस तरह की बयानबाजी से आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं निकलेगा. झामुमो ने स्पष्ट किया कि वे जनता के हितों के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करने और तथ्यों के आधार पर जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध हैं जबकि विपक्ष केवल राजनीतिक खींचतान में लगा है.
धनबाद के लोग अब एक तरफ मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा की उम्मीद कर रहे हैं तो दूसरी तरफ नेताओं के बीच जारी यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर विकास कार्यों को और अधिक उलझा रहा है. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केंद्र और राज्य सरकार समन्वय बनाकर जनता को इन समस्याओं से निजात दिला पाएंगी या राजनीतिक रस्साकशी जारी रहेगी.
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