Dhanbad : धनबाद नगर निगम के चुनाव में मेयर का पद अनारक्षित किए जाने के खिलाफ अनुसूचित जाति (दलित) समाज ने कड़ा विरोध जताया है. दलित संगठनों ने मंगलवार को सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता में राज्य सरकार के फैसले को सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया. इसके विरोध में दलित संगठनों ने 22 जनवरी को रणधीर वर्मा चौक पर महाधरना व दलित अधिकार रैली के आयोजन की घोषणा की.
शांतनु चंद्रा उर्फ बबलू पासवान ने कहा कि उन्होंने नवंबर 2025 में झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. याचिका में उल्लेख किया है कि 2011 की जनगणना के अनुसार धनबाद जिले में अनुसूचित जाति की आबादी करीब दो लाख है. ऐसे में नगर निगम के मेयर पद को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाया कि मेयर सीट को अनारक्षित करना संविधान के समानता, प्रतिनिधित्व व सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है.
दलित संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह आंदोलन केवल धनबाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे झारखंड के दलित समाज के अधिकारों की लड़ाई है. शांतिपूर्ण तरीके से अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे. संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. आवश्यकता पड़ने पर पूरे राज्य में चरणबद्ध आंदोलन भी किया जाएगा. कहा कि उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई जारी है और इसकी अगली सुनवाई 25 जनवरी को निर्धारित है. प्रेसवार्ता में दलित समाज के कई सामाजिक कार्यकर्ता व संगठन प्रतिनिधि मौजूद रहे.
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