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धनबाद :  बेलगड़िया टाउनशिप में रहना ‘कुएं से निकल कर खाई’ में गिरने जैसा

 
Ranjit kumar Dhanbad : धनबाद (Dhanbad)  झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार (जरेडा) के तहत अग्नि प्रभावित और भूधंसान क्षेत्रों से बसाए गए हजारों विस्थापित लोगों के लिए बेलगड़िया टाउनशिप अभिशाप बन गया है. कहा जा सकता है कि ये विस्थापित भूधंसान के कुएं से निकल कर बेलगड़िया टाउनशिप की खाई में जा गिरे हैं. मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर यह टाउनशिप वहां के निवासियों को पल पल दर्द और अभाव का एहसास कराता रहता है.

   पुनर्वास के नाम से ही घबरा जाते हैं लोग

बेलगड़िया में जरेडा के तहत इंदिरा चौक, लोदना, जयरामपुर, गोधर,कतरास, बांसजोडा, कुस्तौर, करकेंद, लिलोरीपथरा, दोबारी लोयाबाद, बालू गद्दा, मोहरी बांध सहित विभिन्न अग्निप्रभावित और भूधसान क्षेत्र से हजारों विस्थापितों को यहां पुनर्वास नीति के तहत बसाया गया है. सुविधाओं के अभाव में जिन लोगों का पुनर्वास अभी बाकी है, वे अब बेलगड़िया आना नहीं चाहते.

  अभिशाप बन गया है पुनर्वास

बेलगड़िया में निवास कर रहे विस्थापित मोहम्मद रिजवान अंसारी. मोहम्मद ताहिर अंसारी, लाली देवी, जीतन राम, मिथिलेश पासवान, बंटी पासी और साबिता देवी ने लगातार के संवादाता को बताया कि जरेडा और बीसीसीएल की ओर से विस्थापितों के लिए निर्मित यह बेलगड़िया टाउनशिप नरक से कम नहीं है. यह पुनर्वास अभिशाप बन कर रह गया है.

 आवास छोटा, रोजगार व शिक्षा की व्यवस्था नदारद

कहा कि बेलगड़िया में आवास काफी छोटा है. रोजगार है ही नहीं. मरीजों के उपचार की भी कोई व्यवस्था नहीं है. इलाज के अभाव में कई लोगों की जान चली गई. अच्छी शिक्षा के लिए स्कूल की भी सुविधा नहीं है. किसी की मौत हो जाए तो उसके संस्कार के लिए 5 हजार रुपये भाड़ा खर्च करना पड़ता है. यही कारण है कि हजारों विस्थापित बेलगड़िया टाउनशिप में पुनर्वास की बात सुन कर ही घबरा जाते हैं. वे यहां आना ही नहीं चाहते. जान जोखिम में डाल कर भूधंसान और अग्निप्रभावित क्षेत्र में ही रहने को विवश हैं. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/national-urban-livelihood-mission-is-not-able-to-provide-employment-in-dhanbad/">धनबाद

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