Dhanbad News : विजयादशमी के अवसर पर हीरापुर स्थित ऐतिहासिक हरि मंदिर में आस्था, परंपरा और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला. मां दुर्गा की विदाई से पहले मंदिर परिसर में पारंपरिक बंगाली रीति-रिवाज के अनुसार सिंदूर खेला का भव्य आयोजन किया गया.
लाल सिंदूर से सजे चेहरों, पारंपरिक परिधानों और महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया. हरि मंदिर की दुर्गा पूजा और यहां का पारंपरिक सिंदूर खेला अपनी विशिष्ट बंगाली संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है.
दस दिनों तक पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से गुलजार रहे मंदिर परिसर में विजयादशमी के दिन मां को विदाई देने का समय आया तो माहौल भावुक हो उठा. पारंपरिक बंगाली वेशभूषा में सजी महिलाओं ने पहले मां दुर्गा के चरणों में सिंदूर अर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया.
इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख, शांति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की.सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं के चेहरों पर जहां उत्सव का उल्लास नजर आया वहीं मां दुर्गा से बिछड़ने की पीड़ा भी साफ झलकी.
लाल सिंदूर की छटा और पारंपरिक रीति-रिवाजों ने इस आयोजन को खास बना दिया.हरि मंदिर में सिंदूर खेला केवल एक धार्मिक रस्म नहीं बल्कि बंगाली संस्कृति, पारिवारिक सौहार्द और नारी शक्ति की परंपरा का प्रतीक बनकर सामने आया.
सिंदूर की लालिमा के बीच मां दुर्गा को विदाई देने के साथ ही श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष उनके फिर आगमन की कामना की. मंदिर परिसर में गूंजती भक्ति और भावनाओं के बीच विजयादशमी का उत्सव यादगार बन गया.

