Dhanbad News : कोयलांचल में जमीन का लगातार धंसना अब सिर्फ हादसों की खबर नहीं बल्कि हजारों परिवारों के अस्तित्व और भविष्य का सवाल बनता जा रहा है. खासकर कतरास-बाघमारा इलाके में पिछले तीन-चार महीनों के दौरान लगातार भू-धंसान, गोफ और जमीन में दरार की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कहीं घर जमींदोज हो रहे हैं, कहीं सड़क और मैदान धंस रहे हैं तो कहीं गोफ बनने से जलस्रोत तक प्रभावित हो रहे हैं. हर नई घटना के साथ स्थानीय लोगों में अपने घर, परिवार और रोजगार की सुरक्षा को लेकर भय गहराता जा रहा है.
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पूर्वजों के समय से बसे इलाकों में रह रहे लोगों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल अपने आशियाने और अस्तित्व को बचाने का है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगातार घटनाओं के बावजूद भू-धंसान की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर अब तक ठोस पहल नहीं हुई है. यही वजह है कि लोगों का आक्रोश अब आंदोलन में बदलने लगा है.

कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा
कतरास बचाओ संघर्ष मोर्चा और छाताबाद बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले रविवार को लोगों ने जनजागरूकता अभियान चलाकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. कतरास, पचगढ़ी और छाताबाद में जुलूस निकालकर लोगों को एकजुट किया गया. प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित लोगों ने कोयला मंत्री, BCCL CMD और DGMS का पुतला दहन कर विरोध जताया.
अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया. इस दौरान हमारी जमीन, हमारा भविष्य, सुरक्षित जीवन, स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित कतरास, भू-धंसान रोको, कतरास बचाओ और विनाश नहीं, विकास चाहिए जैसे नारे लगाए गए. नारों से पूरा इलाका गूंज उठा.
मोर्चा के नेताओं ने कहा कि भू-धंसान की लगातार घटनाएं लोगों के लिए गंभीर खतरे का संकेत हैं. लोगों से अपनी जमीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एकजुट होने की अपील की गई. अभियान के दौरान संदेश दिया गया कि आज आवाज उठाओ, तो कल बचा पाओगे.
भू-धंसान पर रोक और स्थायी समाधान की मांग
आंदोलन कर रहे लोगों ने BCCL और जिला प्रशासन से भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराने, संवेदनशील इलाकों की पहचान करने और लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की. साथ ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, सुरक्षित स्थान पर बसाने और उनकी आजीविका की व्यवस्था करने की भी मांग उठाई गई.
लोगों का कहना है कि सिर्फ घटना के बाद राहत या निरीक्षण से समस्या का समाधान नहीं होगा. भू-धंसान के मूल कारणों की पहचान कर स्थायी समाधान की दिशा में काम करना होगा. मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और उग्र जनआंदोलन शुरू किया जाएगा.
एक साल में भू-धंसान की प्रमुख घटनाएं
6 सितंबर 2025 को कांटापहाड़ी पैच में सर्विस वैन खाई में गिर गई थी. हादसे में सात आउटसोर्सिंग कर्मियों की मौत हुई थी.
31 मार्च 2026 को सोनारडीह के टंडाबाड़ी में जमींदोज की घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी जिनमें पिता-पुत्री भी शामिल थे.
23 अप्रैल 2026 को टंडाबाड़ी बस्ती में दोबारा जमींदोज की घटना हुई जिसके बाद इलाके में दहशत फैल गई.
3 जून 2026 को राजाकोठी में भू-धंसान की चपेट में छह घर आ गए और कई परिवार प्रभावित हुए.
7 जुलाई 2026 को छाताबाद फुटबॉल मैदान में गोफ बनने के साथ जमीन धंस गई
4 अगस्त 2026: गोविंदपुर सेलेक्टेड में भू-धंसान से छह घर प्रभावित हुए.
7 अगस्त 2026 को छाताबाद में फिर जमींदोज की घटना हुई. करीब 12 घर प्रभावित हुए और कई लोग घायल हुए.
26 अगस्त 2026 को छाताबाद के काजूबगान में गोफ बनने से तालाब प्रभावित हुआ.
8 सितंबर 2026 को सिजुआ की तीन पट्टियों में जमींदोज की घटना में एक बच्चे की मौत हुई जबकि परिवार के तीन लोग घायल हुए. कई घर भी प्रभावित हुए.
16 सितंबर 2026 को कतरास इलाके में भू-धंसान से सामुदायिक भवन का हिस्सा प्रभावित हुआ और आसपास के दर्जनों घरों पर खतरा मंडराने लगा.
20 सितंबर 2026 को लोयाबाद सात नंबर मुस्लिम बस्ती में बड़ी भू-धंसान की घटना हुई. चार घर इसकी चपेट में आए जबकि दो घर पूरी तरह जमीन में समा गए.
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने कतरास-बाघमारा से लेकर लोयाबाद तक यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक लोग धंसती जमीन के ऊपर जिंदगी गुजारते रहेंगे और कब भू-धंसान के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाया जाएगा.
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