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Dhanbad News :  जामाडोबा के बड़कीटांड़-जीतपुर रोड पर भू-धंसान, हाइड्रा फंसा, विशाल गोफ बनने से लोगों में दहशत

कोयले की राजधानी की खबरें
  • ग्रामीणों ने जताई बड़े हादसे की आशंका

Dhanbad :  झरिया के जामाडोबा क्षेत्र स्थित बड़कीटांड़-जीतपुर मुख्य सड़क पर रविवार शाम अचानक तेज आवाज के साथ भू-धंसान हो गया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई. इस दौरान सड़क से गुजर रहा एक हाइड्रा वाहन भी इसकी चपेट में आ गया.

 

हालांकि स्थानीय लोगों और चालक की सूझबूझ से काफी मशक्कत के बाद हाइड्रा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे चालक ने राहत की सांस ली. घटना के बाद सड़क किनारे विशाल गोफ (गड्ढा) बन गया है, जिससे इस व्यस्त मार्ग पर आवागमन करने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है.

 

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सोमवार तक भी स्थिति जस की तस बनी रही. प्रशासन की ओर से फिलहाल केवल बैरिकेडिंग कर लोगों को सतर्क किया गया है. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने नहीं पहुंचा है. इससे ग्रामीणों में नाराजगी है.

 

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स्थानीय निवासी एम.डी. इस्लाम अंसारी, हसमुद्दीन अंसारी और मोहम्मद निगार आलम ने बताया कि भू-धंसान के बाद गोफ का आकार लगातार बढ़ता जा रहा है. इससे सड़क के और अधिक धंसने की आशंका बनी हुई है. उन्होंने कहा कि बड़कीटांड़-जीतपुर सड़क जामाडोबा, जीतपुर और आसपास के कई गांवों व बस्तियों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है, जहां प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है. 

 

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ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. उन्होंने संबंधित कोलियरी प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि भूमिगत कोयला खनन के बाद नियमानुसार बालू भराव (सैंड स्टोइंग) नहीं किए जाने के कारण जमीन के नीचे बड़े पैमाने पर खाली स्थान बन गए हैं. यही वजह है कि समय-समय पर भू-धंसान और गोफ बनने की घटनाएं होती रहती हैं.

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स्थानीय निवासी मोहम्मद इस्लाम अंसारी ने बताया कि लगभग तीन वर्ष पूर्व भी इसी स्थान पर भू-धंसान हुआ था. उस समय टाटा कोलियरी प्रबंधन ने केवल अस्थायी मरम्मत कर मामले को टाल दिया था लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया.

 

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अधिकारियों की इसी लापरवाही के कारण एक बार फिर उसी स्थान पर जमीन धंस गई है. उन्होंने कहा कि यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से स्थायी समाधान नहीं किया गया तो सड़क पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है और आसपास के रिहायशी इलाके भी इसकी चपेट में आ सकते हैं.

 

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ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) तथा संबंधित कोलियरी प्रबंधन से तत्काल तकनीकी जांच कराने, भू-धंसान वाले क्षेत्र की वैज्ञानिक ढंग से मरम्मत कराने और भूमिगत खाली स्थानों का सुरक्षित भराव सुनिश्चित करने की मांग की है. साथ ही उन्होंने सड़क की सुरक्षा का आकलन कर आवश्यक होने पर भारी वाहनों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की है.

 

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ग्रामीणों का कहना है कि झरिया कोयलांचल में भू-धंसान की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं लेकिन इनके स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी पहल नहीं हो रही है. उनका कहना है कि यदि इस बार भी केवल औपचारिक कार्रवाई तक मामला सीमित रहा तो भविष्य में यह भू-धंसान किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है.

 

 

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