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धनबादः सोनारडीह भू-धंसान के बाद से दहशत, सुरक्षित आश्रय को तरस रहे पीड़ित

स्थानीय लोगों ने बताया कि भू-धंसान का दायरा धीरे-धीरे फैल रहा है और आसपास के कई घरों पर संकट मंडरा रहा है. दीवारों में दरारें और जमीन में धंसाव के संकेत लोगों की चिंता और बढ़ा रहे हैं. रात होते ही दहशत और गहरी हो जाती है.
 
भू-धंसान से पीड़ित महिलाएं.

Dhanbad : धनबाद जिले के बाघमारा के सोनारडीह ओपी क्षेत्र स्थित टांडाबारी में मंगलवार को हुए भीषण भू-धंसान हादसे के बाद से पूरा इलाका अब भी दहशत में है. इस घटना में तीन लोगों की जान चली गई, जिसके बाद से स्थानीय लोगों में भय, असुरक्षा व आक्रोश का माहौल बना हुआ है. लोग अपने ही घरों में रहने से डर रहे हैं. पीड़ितों को अब तक सुरक्षित आश्रय नहीं मिल पाया है.


स्थानीय लोगों ने बताया कि भू-धंसान का दायरा धीरे-धीरे फैल रहा है और आसपास के कई घरों पर संकट मंडरा रहा है. दीवारों में दरारें और जमीन में धंसाव के संकेत लोगों की चिंता और बढ़ा रहे हैं. रात होते ही दहशत और गहरी हो जाती है. कई परिवार घर छोड़कर खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं.

 

 

घटना के बाद बीसीसीएल प्रबंधन ने इलाके को डेंजर जोन घोषित करते हुए मकानों पर नोटिस चिपकाने और घरों की नंबरिंग का काम शुरू किया है. लेकिन राहत और पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को अब एक नई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों ने कहा कि क्वार्टर आवंटन के नाम पर बीसीसीएल से जुड़े कुछ कर्मी और बिचौलिए रैयती जमीन पर रहने वाले परिवारों से 50 हजार रुपये तक की अवैध वसूली कर रहे हैं. इस संकट की घड़ी में मदद की बजाय उनसे पैसों की मांग की जा रही है.ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि इस पूरे हादसे के पीछे बीसीसीएल की लंबे समय से चली आ रही लापरवाही जिम्मेदार है. 


वहीं दूसरी ओर डेंजर जोन में रह रहे बीसीसीएल कर्मी परिया देवी और अंजू कुमारी का कहना है कि उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाने की बजाय उलझाया जा रहा है. राहत की प्रक्रिया धीमी है और स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी से लोग भ्रमित हैं. प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि उन्हें कब तक सुरक्षित आश्रय, पारदर्शी पुनर्वास और न्याय मिल पाएगा. 


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