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धनबाद : तीन दिनों से मां की लाश के साथ रह रहा था बेटा

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जेसी मल्लिक रोड मास्टरपाड़ा की घटना, दुर्गंध से परेशान पड़ोसियों ने पुलिस को दी सूचना

बेटे का कहना था मां अभी जिंदा है, लोग उसे बता रहे मानसिक बीमार

Dhanbad : धनबाद शहर के जेसी मल्लिक रोड स्थित मास्टर पाड़ा में एक अजीब वाकया प्रकाश में आया है.  मोहल्ले के उपाध्याय भवन में रहने वाले युवक सौरभ उपाध्याय अपनी मां आशा उपाध्याय क शव के साथ तीन दिनों तक घर में रहा. वह कहता था मां जिंदा है. शव जब सड़ने लगा, तो उसकी दुर्गंध से पूरे मुहल्ले के लोग परेशान हो उठे. लोग बेटे को मां का अंतिम संस्कार करने को कह रहे थे, लेकिन बेटा एक ही रट लगाए था कि उसकी मां अभी जिंदा है, यहकर वो मां की लाश को घर पर रखे हुए थे. अंत में मामले की खबर पुलिस को दी गई और मुहल्ले के लोगों ने मिलकर लाश को किसी तरह घर से निकालकर अंतिम संस्कार के लिए भेजा. सौरभ उपाध्याय इंजीनियरिंग डिग्रीधारक है. देखने से भी पूरी तरह स्वस्थ है.

मां को अस्पताल लेकर गया, फिर वापस ले आया

सौरभ उपाध्याय के पिता बंगाल में नौकरी करते हैं. घर पर वह अपनी मां आशा उपाध्याय व मौसी वीणा उपाध्याय के साथ रह रहा था. मुहल्ले के लोगों ने बताया कि दो दिनों से सौरभ के मकान से काफी दुर्गंध आ रही थी. पता करने पर जानकारी मिली कि शुक्रवार को सौरभ अपनी मां को लेकर एसएनएमएमसीएच गया था, उसका कहना था कि मां बीमार है. इधर कुछ लोगों का कहना है कि उसकी मां की मौत हो चुकी थी, दबाव बनाने पर सौरभ मां को लेकर अस्पताल चला गया था, लेकिन बिना डाक्टर को दिखाए ही वापस आ गया. वापस लाकर उसने मां को फिर से कमरे में रख दिया, हालांकि आसपास के घरों तक शव के सड़ने की दुर्गध पहुंचने लगी.

बाथरूम में गिरकर हो गई थी घायल

सौरभ की मौसी वीणा उपाध्याय (उम्र करीब 75 वर्ष) ने बताया कि  दस दिन पहले उसकी छोटी बहन आशा उपाध्याय बाथरूम जाने के क्रम में गिर गई थी. इसके बाद से वह काफी सो रही थी. कई दिनों तक लगातार सोती रही. कभी-कभार उठकर कुछ कहती थी. वीणा को भी नहीं पता था कि आशा की मौत हो चुकी है. आशा ने वहां पहुंचे पत्रकारों से पूछा कि क्या उसकी बहन की मौत हो चुकी है, फिर उन्हें घटना की जानकारी दी गई. इधर, पुलिस के पहुंचने के बाद भी कई घंटों तक सौरभ किसी को घर में प्रवेश करने नहीं दे रहा था. अंत में उसे डाक्टर के पास भेजने की बात कही गई, कहा गया कि जाकर डाक्टर को लेकर आओ, तब फैसला करेंगे कि मौत हुई है या नहीं. इस बात पर वह मुहल्ले के एक युवक के साथ घर से बाहर गया. इसी बीच लोगों ने उसकी मां के शव को कमरे से बाहर निकाला. सौरभ के कई नजदीकी रिश्तेदार भी वहां मौजूद थे. स्थानीय पूर्व पार्षद प्रियरंजन समेत कई लोगों ने शव को निकाल कर अंतिम संस्कार के लिए भिजवा दिया. यह भी पढ़ें : गोड्डा">https://lagatar.in/elections-in-godda-on-june-1-nishikant-will-file-nomination-on-may-10-2-news-including/">गोड्डा

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