Nirsa : निरसा (Nirsa) चिरकुंडा स्थित अग्रसेन भवन में श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन 18 जुलाई सोमवार देर शाम वृंदावन से आए कथा वाचक उत्तम कृष्ण शास्त्री ने नंदोत्सव की माखन चोरी लीला, चीर हरण लीला एवं गोवर्धन लीला का वर्णन किया. कथावाचक ने कहा कि माखन चोरी लीला का मूल उद्देश्य प्रभु का ब्रज वासियों को जो ग्वाला थे, उनको हक दिलाना. क्योंकि जो ब्रजवासी थे, वह सारा माखन दूध, दही मथुरा ले जाकर देते थे. जिस कारण उन्हें ठीक से खाने को नहीं मिलता था. जब यह बात भगवान श्री कृष्ण को मालूम हुई तो उन्होंने एक चोर मंडली बनाई और उनको उनका भाग दिलाने लगे. उन्होंने कहा कि शास्त्र के अनुसार सबसे बड़ा धर्म दूसरों की सेवा करना है. उन्होंने कहा कि परहित सरिस धर्म नहीं भाई पर पीड़ा नहीं सम अधभाई. इसलिए भगवान ने माखन चोरी लीला के माध्यम से सभी को सुख प्रदान किया. उन्होंने आगे चीर हरण लीला का वर्णन करते हुए कहा कि कृष्ण जी ने गोपियों को शिक्षा देने के लिए उनका वस्त्र हरण किया. जिस समय प्रभु ने वस्त्र चुराये, उस समय उनकी उम्र मात्र 6 वर्ष की थी. इस चीर हरण लीला में कोई दोष नही है. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-living-in-belgadia-township-is-like-falling-out-of-a-well-and-falling-into-a-ditch/">धनबाद
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धनबाद: दूसरों की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म : शास्त्री

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