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धनबाद: जिला परिषद के पास फंड ही नहीं, कैसे होगा गांवों का विकास

Dhanbad: धनबाद (Dhanbad)  नवगठित धनबाद जिला परिषद के पास फंड ही नहीं है. फंड के बगैर विकास कार्य कैसे होगा. वैसे जिला परिषद के पास अरबों रुपये की चल अचल संपत्ति है. एक हजार से अधिक दुकान हैं.गेस्ट हाउस, सामुदायिक भवन, विवाह मंडप और टाउन हॉल भी है. फिर भी फंड नहीं होने का रोना है. वह इसीलिए कि दुकानों का करोड़ों रुपये किराया बकाया पड़ा है. सभी बकाया राशि की वसूली हो जाए तो आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है.  जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह कहती हैं कि फंड की किल्लत है. कहा कि बकाया रखनेवालों की लिस्ट निकाली गई है.  उन्हें नोटिस भेजा जाएगा. कहा कि विवाह मंडप बनकर बेकार पड़ा है. फंड जुटाने के लिए रणनीति बनाई जा रही है.

 पुरानी योजनाओं के काम का भुगतान भी बाकी

जिला परिषद के नवनिर्वाचित सदस्यों की बैठक विगत 14 जुलाई को हुई थी. बैठक में जिला परिषद की माली हालत को सुधारने का मुद्दा छाया रहा.  कई नये सदस्यो को मालूम ही नहीं था कि जिला परिषद की आय का स्रोत क्या है.  कौन सी चीज जिला परिषद के अधीन है. हालत यह है कि जिला परिषद के पास एक करोड़ की राशि भी नहीं है. दूसरी तरफ पुरानी विकास योजनाओं के तहत काम के एवज में ठेकेदार ने तीन करोड़ से भी अधिक का बिल जमा कर दिया है. भुगतान कैसे हो, इस मामले पर असमंजस बना हुआ है.

  राजेंद्र सरोवर निगम की संपत्ति : नगर आयुक्त

जिला परिषद बोर्ड की 14 जुलाई की बैठक में सदस्यों ने सुझाव दिया था कि राजेंद्र सरोवर को जिला परिषद के अधीन लाया जाना चाहिए. जिला परिषद की बैठक में इस सुझाव पर नगर आयुक्त सतेंद्र कुमार का कहना है कि राजेंद्र सरोवर नगर निगम की संपत्ति है. इस पर कोई दावा नहीं कर सकता है. जिला परिषद ग्रामीण क्षेत्र में आता है, शहर में नगर निगम है. कहा कि दुकानों की तोड़ फोड़ और किसी भी प्रकार के निर्माण का अधिकार किसी को नहीं है. जिला परिषद ने अतिक्रमण कर निर्माण कर रखा है. जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह से जब इन सवालों पर बात की गई तो उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की. उन्होंने कहा कि अभी लिस्ट निकाल रहे हैं कि जिला परिषद के अधीन क्या क्या है. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-repeated-disruptions-in-the-construction-of-telipada-sub-station-for-seven-years/">धनबाद

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