New Delhi : पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में हर किसी की कार्यक्षमता अलग-अलग समय पर चरम पर होती है. कुछ छात्र ब्रह्म मुहूर्त (सुबह) में अच्छी पढ़ाई कर पाते हैं, तो कुछ देर रात तक जागकर एकाग्र हो पाते हैं.
Students hail PM Modi's 'mantras' on study techniques and stress management at Pariksha Pe Charcha
— ANI Digital (@ani_digital) February 6, 2026
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पीएम मोदी ने छात्रों को सलाह दी कि अपने पैटर्न पर भरोसा रखें. कहा कि दूसरों की राय जरूर सुनें, लेकिन उसे अपनी जीवनशैली में तभी शामिल करें, जब आपको लगे कि यह यह आपके लिए फायदेमंद होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा के 9वें एडिशन में देशभर से आये बच्चोंं से मुलाकात की. दिल्ली स्थित पीएम आवास पर मोदी ने बच्चों को असम के गमछे पहनाये. इसके बाद सवाल जवाब का दौर शुरू हुआ.
इस अवसर पर श्री मोदी ने बच्चों को सलाह दी कि वे विदेशी चीजें छोड़कर स्वदेशी चीजें अपनायें. बच्चों से कहा कि वो 25 साल में विकसित भारत बनाने को अपना सपना बनायें
एक छात्र के सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा, मार्क्स की बीमारी कैसे फैल गयी, पता नहीं. पूछा कि आप लोगों को पिछले साल के टॉप 1 से 10 तक आये छात्रों के नाम याद हैं क्या?
पीएम मोदी ने कहा कि यह उप्लब्धि महज कुछ देर के लिए ही होती है. पीएम ने बच्चों से कहा, हमें ये देखना चाहिए कि पढ़ाई का हमारे जीवन पर क्या असर हुआ है. यह न देखें कि हमारे मार्क्स कितने आये हैं.
पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों को शिक्षकों, अभिभावकों और सलाहकारों द्वारा दिये गये सुझावों को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए और उन्हें गहराई से समझना चाहिए, और फिर जो उपयोगी लगे, उसे अपनाना चाहिए.
प्रधानमंत्री ने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे दूसरों की अंधाधुंध नकल करने के बजाय, उन्हें मिलने वाली किसी भी सलाह में अपने स्वयं के अनुभवों और आत्म-समझ को शामिल करें.
कार्यक्रम के दौरान गुजरात की एक छात्रा ने प्रधानमंत्री से कहा कि परीक्षा के समय शिक्षक हमें एक अलग तरीका बताते हैं. माता-पिता कुछ अलग बतलाते हैं, जबकि छात्र का अपना एक अलग तरीका होता है.
छात्रा की इस दुविधा का पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया. उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति केवल छात्रों के समक्ष नहीं आती, बल्कि उनके समक्ष भी आती है. उन्होंने छात्रा से कहा, मैं प्रधानमंत्री हूं, फिर भी लोग मुझे अलग-अलग तरीके से काम करने की सलाह देते हैं
प्रधानमंत्री ने इससे संबंघित एक उदाहरण दिया. कहा कि जब कोई परिवार एक साथ बैठकर खाना खाता है, तो ध्यान दीजिए कि हर किसी का तरीका अलग होता है. कोई पहले सब्जी खाता है, कोई दाल से शुरू करता है, तो कोई सब कुछ मिलाकर खाने लगता है.
पीएम ने कहा कि हर आदमी अपने पैटर्न के हिसाब से खाने का आनंद उठाता है. इसी तरह पढ़ाई के समय मे जब छात्र अपने सरल तरीके से पढ़ाई करता है, तो वह बेहतर परिणाम हासिल करता है.
परीक्षा पे चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने खुद का उदाहरण दिया. बताया कि उन्होंने समय के साथ किस तरह इस कार्यक्रम के स्वरूप में बदलाव किया. हैं. उन्होंने कहा कि शुरू में यह कार्यक्रम एक अलग तरह प्रस्तुत किया जाता था,
लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने छात्रों के साथ सीधा संवाद शुरू किया. राज्यों के हिसाब से बदलाव किये. पीएम ने कहा कि इस क्रम में उन्होंने नयी नयी चीजें तो सीखीं, लेकिन अपना मूल तरीका और अपना स्वभाव कभी नहीं त्यागा.
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