Ranchi: बिल्डर के ठिकानों पर जारी आयकर सर्वे के दौरान अब तक 50 करोड़ रुपये से अधिक के टैक्स चोरी से संबंधित दस्तावेज मिले हैं. कोलकाता से आये फॉरेंसिक टीम द्वारा डिजिटल डिवाइस से निकाले गए डाटा में ब्लैक मनी देकर फ्लैट खरीदने वालों का ब्योरा मिला है. इससे ब्लैक मनी के सहारे फ्लैट खरीदने वालों की मुश्किलें बढ़ेंगी.
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आयकर विभाग द्वारा PANAS और दयानंद ग्रुप के ठिकानों पर दूसरे दिन भी सर्वे जारी है. समाचार लिखे जाने तक इन बिल्डरों के ठिकानों से अपनी वास्तविक आमदनी छिपा कर 50 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी किये जाने से संबंधित ब्योरा मिला है. बिल्डरों के ठिकानों पर लगे कंप्यूटर, लैपटॉप और संबंधित बिल्डरों के पार्टनर्स और निदेशकों के मोबाइल डेटा निकालने के लिए कोलकाता से फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया था.
फॉरेंसिक टीम द्वारा निकाले गए डाटा और वाट्सएप चैट में कई महत्वपूर्ण सूचनाएं मिली हैं. इसमें ब्लैक मनी देकर फ्लैट खरीदने वालों का नाम और दी गयी राशि का ब्योरा दर्ज है. बताया जाता है कि एक-एक खरीददार ने ब्लैक में (नकद) एक-एक करोड़ रुपये का भुगतान किया है. फ्लैटों की सामान्य बिक्री के दौरान 30%-50% तक ब्लैक मनी (नकद राशि) लेने का सबूत डिजिटल डिवाइस से मिला है. फॉरेंसिक टीम द्वारा निकाले गए डाटा के आलोक में फ्लैट खरीददारों से भी जल्द पूछताछ किये जाने की सूचना है.
आयकर विभाग द्वारा जारी सर्वे के दौरान बिल्डर के ठिकानों से मिले दस्तावेज से इस बात की भी जानकार मिली है कि ज्यादातर जमीन मालिकों ने अपने हिस्से पर लगने वाला पूरा टैक्स नहीं चुकाया है. कुछ जमीन मालिकों द्वारा बिल्डरों के साथ किए गए एग्रिमेंट की जानकारी भी आयकर विभाग को नहीं दी गयी है. सर्वे के दौरान मिले दस्तावेज के आधार पर आयकर विभाग द्वारा इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या किसी ने बेनामी संपत्ति भी बनायी है.
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