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नाटो समिट में डोनाल्ड ट्रंप की तुर्किये के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन से हुई मुलाकात, क्या खिचड़ी पकी...

Wasington :  खबर है कि नीदरलैंड के द हेग शहर में आयोजित नाटो समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से तुर्किये के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन मिले. यह मुलाकात उस समय हुई है, जब ट्रंप ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर करवाने का दावा कर चुके हैं.

 

अहम बात यह है कि एर्दोगन को चाइनीज खेमे का राष्ट्राध्यक्ष माना जाता है. बता दें कि तुर्की ने हाल के वर्षों में चीन के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध काफी बढ़ाए हैं. बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) इसकी महत्वपूर्ण कडी है. यह जानना जरूरी है कि तुर्की के राष्ट्रपति ने चीन, रूस और ईरान के साथ पिछले कुछ सालों में मजबूत संबंध बनाये हैं.

 

 
ट्रंप की सोच है कि  चीन से सीधे टकराने से ज्यादा अच्छा है कि उसके स्ट्रैटेजिक क्लाइंट्स को अपने पाले में लाकर उसका प्रभाव कम किया जाये. पाकिस्तान, तुर्की जैसे देश ट्रंप के समीकरण में फीट बैठते हैं.  वहीं पाकिस्तान, तुर्की, ईरान जैसे देशों से चीन को डिप्लोमैटिक और इकोनॉमिक ताकत मिलती रही है. ट्रंप के लिए इस गठजोड़ को तोड़ना जरूरी है.

 

जानकारी के अनुसार इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, रक्षा सहयोग और मध्य पूर्व और यूक्रेन सहित वैश्विक संघर्षों पर मंथन हुआ. कहा गया कि एर्दोगान ने ट्रंप की पहल से इजरायल और ईरान के बीच हुए युद्ध विराम का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की कि युद्ध विराम स्थायी रहेगा.

 

 

जानकारों का कहना है कि एर्दोगन ने ट्रंप की वैश्विक नेतृत्व क्षमता में अपना भरोसा जताया है. मुलाकात के  दौरान दोनों नेताओं के बीच काफी अच्छी केमिस्ट्री देखने को मिली. एर्दोगन ने कहा कि रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों को द्विपक्षीय व्यापार में 100 बिलियन डॉलर के अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी. 

 


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले पाकिस्तान आर्मी चीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के   साथ लंच किया था. पाकिस्तान चीन का करीबी माना जाता है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद परेशानी में फंसे आसिम मुनीर को ट्रंप ने तुरंत वाशिंगटन बुलाया था.  


 
 
 

 

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