चमरा की क्या-क्या है चाहत
कहने को तो इस महारैली को गैर राजनीतिक बताया जा रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि चमरा की चाहत पूरी नहीं हो रही, इसलिए 2024 के चुनाव के पहले वे अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते हैं. बताना चाहते हैं कि हमें कमतर मत आंको. उनकी पहली चाहत है, राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिले. दूसरी चाहत उनके समर्थकों को बोर्ड-निगम में पर्याप्त जगह मिले. और पार्टी यदि उनकी यह चाहत पूरी नहीं कर सकती, तो लोहरदगा संसदीय सीट से उन्हें टिकट देने का वादा करे.भाजपा को भी अपनी ताकत दिखाने की है चाहत
चमरा लिंडा इस महारैली के माध्यम से न केवल झामुमो, बल्कि भाजपा को अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते हैं. 2024 में लोहरदगा संसदीय सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं. अगर गठबंधन के तहत लोहरदगा सीट झामुमो के बदले कांग्रेस को जाती है, तो उनका अगला पड़ाव भाजपा भी हो सकता है. इसलिए वे इस महारैली के माध्यम से भाजपा को भी अपने ताकत दिखाना चाहते हैं, ताकि दक्षिणी छोटानागपुर व कोल्हान की एसटी सीटों से लगभग सिमट चुकी भाजपा आदिवासियों के बीच उनके सहारे फिर से खुद को स्थापित करने की सोच सके? और झामुमो से छिटकने की स्थिति में उन्हें कैच कर ले.महारैली तो बहाना है, सीएम पर साधना निशाना है
चमरा लिंडा ने आदिवासी अधिकार महारैली के जो मुद्दे तय किए हैं, उसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ही निशाने पर रहेंगे. रैली को लेकर जारी पंपलेट भी वितरित किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने आदिवासियों के हित में 16 मांगें रखी है. पंपलेट में कहा गया है कि आदिवासियों को संवैधानिक अधिकार देने एवं संविधान का अनुपालन करते हुए आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए कई मामलों में अधिनियम या नियमावली बनाने की जरूरत है. कहा गया कि कुरमी महतो भाइयों ने आंदोलन कर अपने हित के लिए 1932 का खतियान एवं आरक्षण सीमा 14 से 27 प्रतिशत बढ़ाने का विधेयक पास करा लिया. मगर अब आदिवासियों के हित के कानून पास कराने के लिए आंदोलन की बारी हमारी है.महारैली में जिन मुद्दों को उठाने की है बात
- -कुरमी- महतो को आदिवासी में शामिल करने का हर कदम रोका जाए.
- - जनगणना फॉर्म में सरना कोड अंकित किया जाए.
- धार्मिक-सामाजिक जमीन के लिए नियमावली बनायी जाए.
- - गैर आदिवासी पुरुष आदिवासी महिला से विवाह करता है, तो उसके बाल-बच्चों को आदिवासी लाभ से वंचित किया जाए.
- - आदिवासी की जितनी बैकलॉग रिक्तियां है, उसे भरा जाए.
- - संविधान 350 (क) के प्रावधान के अनुसार आदिवासी भाषा की पढ़ाई प्राथमिक विद्यालय में प्रारंभ करो.
- - सीएनटी एक्ट और पांचवी अनुसूची दोनों कानून को अलग किया जाए. सीएनटी एक्ट छोटानागपुर में लागू रहे, लेकिन (पांचवीं अनुसूची) या धारा-244 (1) झारखंड के 13 जिलों में लागू करने की नियमावली तैयार करो. टीएसी का चेयरमैन का चुनाव उसके 15 सदस्य में से हो, इसकी नियमावली बनाओ.
- -एसएआर कोर्ट तुरंत नया स्थापित करो, उसमें ज्यूडिशियल पावर प्रदत करने की नियमावली बनाओ.
आदिवासियों के अधिकार के लिए है महारैली : चमरा लिंडा
सरकार बने तीन साल हो गए. मगर अब भी आदिवासी अस्मिता के मुद्दे जस के तस हैं. 1932 का खतियान और ओबीसी आरक्षण का सबसे अधिक फायदा तो कुरमी को मिलना है. इससे आदिवासियों को ज्यादा धिक फायदा होने वाला नहीं है. यह महारैली आदिवासियों को उनका अधिकार व हक दिलाने के लिए बुलायी गयी है. प्रभात तारा मैदान में अब तक सबसे बड़ी रैली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रही है, लेकिन उनकी महारैली उससे भी बड़ी होगी. इसे भी पढ़ें : प्रोन्नति">https://lagatar.in/no-posting-on-promotion-3-additional-secretary-doing-the-work-of-deputy-secretary/">प्रोन्नतिपर पदस्थापन नहीं- 3 : अपर सचिव कर रहे उप सचिव का काम [wpse_comments_template]

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