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झारखंड में सरसों अनुसंधान के लिए डॉ. अरुण कुमार को मिला राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक

Ranchi: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार को झारखंड में सरसों अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय तिलहन सम्मेलन-2026 के दौरान स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया. यह सम्मान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली में 8 फरवरी 2026 को आयोजित समारोह में प्रदान किया गया.

 

देशभर में सोसायटी फॉर रेपसीड-मस्टर्ड रिसर्च और भारतीय सरसों एवं रेपसीड अनुसंधान संस्थान, भरतपुर (राजस्थान) द्वारा स्थापित पांच स्वर्ण पदकों में से एक स्वर्ण पदक डॉ. अरुण कुमार को प्रदान किया गया. सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 350 वैज्ञानिकों ने भाग लिया.

 

डॉ. अरुण द्वारा विकसित उन्नत किस्म ‘बिरसा भाभा मस्टर्ड-1’ झारखंड में काफी लोकप्रिय है और बड़े क्षेत्र में इसकी खेती की जा रही है. बड़े दानों वाली इस किस्म में लगभग 40 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है. इसे भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई के सहयोग से विकसित किया गया है. यह किस्म 112 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी औसत उत्पादन क्षमता 14.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.

 

सम्मान समारोह में आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव ने डॉ. अरुण को पुरस्कार प्रदान किया. इस अवसर पर पादप किस्म एवं किसान अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष और पूर्व महानिदेशक, आईसीएआर, डॉ. त्रिलोचन महापात्र व रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद कुमार भी उपस्थित थे.बीएयू के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे, निदेशक (अनुसंधान) डॉ. पी.के. सिंह और विभागाध्यक्ष डॉ. मणिगोपा चक्रवर्ती ने डॉ. अरुण कुमार को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी है.

 

 

 

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