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करोड़ों के इंटरसेप्टर वाहन बेकार
पांच पहले साल 2018 में झारखंड में छह इंटरसेप्टर गाड़ियां खरीदी गयी थीं. इनमें दो गाड़ियां रांची के लिए, एक-एक गाड़ियां जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग व बोकारो को दी गयी हैं. इंटरसेप्टर वाहन के जरिए स्पीड लिमिट को तोड़ने वाले वाहनों को उपकरणों में कैद किया जाता है. फिर उन्हें ई-चालान भेजा जाता है. लेकिन सड़क पर वाहनों की अधिकतम स्पीड क्या होगी, इसका निर्धारण अब तक नहीं किया जा सका है. ऐसे में पुलिसकर्मियों इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. इसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं होने से करोड़ों के इंटरसेप्टर वाहन बेकार पड़े हैं. इसे भी पढ़ें : दिल्ली">https://lagatar.in/delhi-liquor-scam-rajya-sabha-mp-raghav-chadhas-name-in-eds-second-supplementary-charge-sheet/">दिल्लीशराब घोटाला : ईडी की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम!
इंटरसेप्टर वाहन पर लगा रहता है स्पीड गन कैमरा
इंटरसेप्टर वाहन पर स्पीड गन कैमरा लगा रहता है. जो अपने आसपास में तेज गति से गुजरने वाले वाहनों की स्पीड को कैच कर लेता है. यदि स्पीड से ज्यादा वाहन की गति हुई तो वाहन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती हैय इसमें ऑटोमेटिक चालान कट जाता है. इसके अलावा तेज गति से वाहन चलाने वालों के खिलाफ उनके रजिस्टर्ड मोबाइल पर यह मैसेज भी भेज दे दिया जाता है. जिसमें लिखा होता है कि आपने वाहन को काफी तेज गति से चलाया है. इसलिए फाइन भरना होगा. अगर यह गलती तीन बार हो जाती है तो उनका ड्राइविंग लाइसेंस भी कैंसल किया जा सकता है. इसे भी पढ़ें : आर्थिक">https://lagatar.in/good-news-came-on-the-economic-front-gst-collection-in-april-increased-by-12-percent-to-1-point-87-lakh-crore/">आर्थिकमोर्चे पर आयी गुड न्यूज, अप्रैल में जीएसटी कलेक्शन 12 फीसदी बढ़कर 1.87 लाख करोड़ पहुंचा [wpse_comments_template]

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