Ranchi : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (डीएसपीएमयू) में नॉन-टीचिंग कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन दो सप्ताह से अधिक समय से जारी है. कर्मचारियों का आरोप है कि इतने लंबे समय से धरना चलने के बावजूद कुलपति डी.के. सिंह अब तक विश्वविद्यालय परिसर नहीं पहुंचे. इसी के विरोध में कर्मचारियों ने आज विश्वविद्यालय में तालाबंदी कर दी और अपने आंदोलन को और तेज कर दिया.
नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की हड़ताल के कारण विश्वविद्यालय का नियमित कामकाज प्रभावित हो रहा है और कई विभागों में ‘पेन डाउन’ की स्थिति बनी हुई है. कर्मचारियों का कहना है कि कुलपति के पास तीन विश्वविद्यालयों का अतिरिक्त प्रभार है, लेकिन इतने बड़े आंदोलन के बावजूद उनका परिसर में नहीं आना गंभीर विषय है.
जनवरी में कार्यभार संभालने के बाद से कुलपति ने कर्मचारियों को मिलने का समय नहीं दिया है. उन्होंने कहा कि अब उन्हें प्रभु बनाकर ही याचना करनी पड़ रही है, ताकि वे आकर कर्मचारियों को दर्शन दें.
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारियों की मुख्य मांग एमएसीपी (MACP) भुगतान की बहाली है. उनका कहना है कि जुलाई 2020 से सीनेट, सिंडिकेट और वित्त विभाग द्वारा स्वीकृत एमएसीपी का भुगतान अचानक रोक दिया गया है, जिसे तत्काल बहाल किया जाना चाहिए.
इसके अलावा कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूअल की स्पष्ट नीति बनाने की मांग कर रहे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि पहले 11 महीने के आधार पर कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू किया जाता था, लेकिन अब बिना किसी स्पष्ट नीति के इसे 31 मार्च 2026 तक सीमित कर दिया गया है, जो नियमों के विपरीत है.
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका ‘पेन डाउन’ आंदोलन और धरना जारी रहेगा. फिलहाल प्रदर्शनकारी प्रशासनिक भवन परिसर में ही डेरा डालकर आंदोलन कर रहे हैं, जहां वे खाना बना रहे हैं और रात में भी वहीं रह रहे हैं.
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