Ranchi : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में शिक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में दो अहम फैसले लिए गए हैं. इसके तहत बीएड कोर्स से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों के लिए करीब 20 वर्षों से चली आ रही सेवा ब्रेक की व्यवस्था पर अब रोक लगा दी गई है.
वहीं विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अब एक्टिंग (प्रभारी) एचओडी को भी नियमित विभागाध्यक्षों की तरह सभी सुविधाएं देने का फैसला लिया गया है. डीएसपीएमयू प्रशासन के प्रस्ताव को राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने मंजूरी दे दी है.
राज्यपाल की स्वीकृति के बाद दोनों फैसलों से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई है. विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इन दोनों निर्णयों से न केवल शिक्षकों को राहत मिलेगी, बल्कि शिक्षण व्यवस्था की निरंतरता बनी रहेगी और प्रशासनिक कामकाज भी अधिक प्रभावी होगा.
शैक्षणिक सत्र के बाद कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों को किया जाता था सेवा मुक्त
बता दें कि बीएड कोर्स में कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत शिक्षकों को हर साल शैक्षणिक सत्र के बाद तकनीकी रूप से सेवा से मुक्त किया जाता था. इसके बाद दोबारा शिक्षकों की नियुक्ति की जाती थी, जिससे शिक्षकों में असुरक्षा की स्थिति बनी रहती थी. साथ ही छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी.
सेवा ब्रेक की व्यवस्था राष्ट्रीय अध्यापन प्रशिक्षण परिषद (एनसीटीई) की गाइडलाइन के अनुरूप भी नहीं थी. लेकिन डीएसपीएमयू प्रशासन के इस फैसले के बाद बीएड के कॉन्ट्रैक्ट शिक्षक अन्य शिक्षकों की तरह 65 वर्ष की आयु तक सेवा दे सकेंगे. इन शिक्षकों का पदनाम सहायक प्रोफेसर होगा.
एक्टिंग एचओडी को भी मिलेगा 33 दिन का अर्जित अवकाश
दूसरे फैसले के तहत एक्टिंग एचओडी (प्रभारी) को भी अब नियमित विभागाध्यक्षों के समान सुविधाएं दी जाएंगी. अब उन्हें भी हर साल 33 दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा. हालांकि नियमित एचओडी की तरह ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान उन्हें विश्वविद्यालय हित में आवश्यक सेवाओं के लिए मुख्यालय में उपलब्ध रहना होगा. विश्वविद्यालय को यह अधिकार होगा कि शैक्षणिक या प्रशासनिक आवश्यकता पड़ने पर अवकाश अवधि में भी विभागाध्यक्षों की सेवाएं ली जा सकें.
रांची विश्वविद्यालय सहित संस्थानों पर पड़ सकता है असर
रांची विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों में कार्यरत बीएड शिक्षकों को सेवा ब्रेक और एक्टिंग एचओडी को नियमित जैसी सुविधाएं नहीं मिलती है. हालांकि डीएसपीएमयू के इन दोनों प्रस्ताव को राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद इसका असर झारखंड के अन्य विश्वविद्यालयों पर भी पड़ सकता है. बता दें कि राज्य के कई विश्वविद्यालयों में लगभग 80 प्रतिशत विभाग एक्टिंग एचओडी के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं.
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