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ECMWF का पूर्वानुमान, पूर्वोत्तर मॉनसून में दक्षिण भारत में अच्छी बारिश के संकेत

2026 के पूर्वोत्तर मॉनसून (अक्टूबर से दिसंबर) को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है. यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) के ताजा मौसमी पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण भारत में इस दौरान सामान्य से बेहतर बारिश होने की संभावना है.
 

Lagatar Desk :  भारत में इस समय दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार कमजोर पड़ती दिख रही है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में सक्रिय एक शक्तिशाली चक्रवात की वजह से मॉनसून के बादल पूर्व की ओर खिंच गए हैं. जिसकी वजह से पश्चिमी और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश कम हो गई है और कुछ इलाकों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं.

 

हालांकि, इस बीच 2026 के पूर्वोत्तर मॉनसून (अक्टूबर से दिसंबर) को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है. यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) के ताजा मौसमी पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण भारत में इस दौरान सामान्य से बेहतर बारिश होने की संभावना है.

 

 

केरल और तमिलनाडु में अच्छी बारिश के संकेत

ECMWF के मुताबिक, केरल, तमिलनाडु और श्रीलंका के आसपास सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है. ये इलाके पूर्वोत्तर मॉनसून पर सबसे ज्यादा निर्भर रहते हैं, क्योंकि इस दौरान बंगाल की खाड़ी से आने वाली उत्तर-पूर्वी हवाएं नमी लेकर आती हैं. हालांकि, उत्तरी तमिलनाडु और आसपास के कुछ क्षेत्रों में कोई खास मजबूत संकेत नहीं मिले हैं. हालांकि इन इलाकों में सामान्य बारिश होने की संभावना बनी हुई है.

 

अल-नीनो और IOD का असर

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल अल-नीनो मजबूत हो सकता है, जो आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को कमजोर करता है. लेकिन पूर्वोत्तर मॉनसून पर इसका असर अलग हो सकता है. वहीं, पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) बनने की संभावना भी जताई गई है. इससे भारतीय महासागर से भारत की ओर नमी का प्रवाह बढ़ सकता है, जो दक्षिण भारत में बारिश के लिए अनुकूल माना जाता है.

 

स्थानीय मौसम प्रणालियां बढ़ा सकती हैं बारिश

विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी और कोमोरिन सागर में निम्न दबाव के क्षेत्र और पूर्वी हवाओं (ईस्टर्ली वेव्स) के बनने की संभावना है. ये सिस्टम तमिलनाडु और केरल के तटीय इलाकों में अच्छी बारिश ला सकते हैं.

 

MJO पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) पूर्वोत्तर मॉनसून के दौरान सबसे अहम भूमिका निभा सकता है. अगर यह सिस्टम भारतीय महासागर के ऊपर सक्रिय रहता है, तो बारिश की गतिविधियां मजबूत हो सकती हैं और अल-नीनो जैसे कारकों का असर कम पड़ सकता है.

 

किसानों के लिए अच्छी खबर

अगर पूर्वानुमान सही साबित होता है, तो दक्षिण भारत के किसानों को बड़ा फायदा मिल सकता है. अच्छी बारिश से रबी फसलों की बुवाई, जलाशयों का जलस्तर और भूजल भंडार बेहतर होंगे. इससे सिंचाई की स्थिति भी मजबूत होगी.

 

 

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