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झारखंड एक लैंडलॉक राज्य
शिक्षा मंत्री ने कहा कि झारखंड वनों की भूमि है. यहां 29 प्रतिशत से अधिक भूमि वनाच्छादित है. झारखंड एक लैंडलॉक (चारों ओर से जमीन से घिरा) राज्य है, जहां हाथियों की एक स्वस्थ आबादी विचरण करती है. यह राज्य चारों तरफ से हाथियों के प्रवास अनुकूल क्षेत्र वाले राज्यों से भी घिरा हुआ है और ईस्ट सेंट्रल एलिफेंट लैंडस्कैप के रूप में चिह्नित है. यह परिदृश्य जहां एक ओर उचित वैज्ञानिक वन्यप्राणी प्रबंधन में कठिनाई उत्पन्न करता है, वहीं दूसरी ओर संबंधित राज्यों के बीच आपसी समन्वय के महत्त्व एवं उसकी आवश्यकता को इंगित करता है.हमारे पास बड़े निरंतर वन क्षेत्र नहीं
नवीनतम गणना से पता चलता है कि झारखंड में लगभग 600 से 700 हाथियों का बसेरा है. हमारे पास संतोषजनक वन क्षेत्र है, लेकिन हमारे पास बड़े निरंतर वन क्षेत्र नहीं हैं. भूमि खंडित है और जानवरों के गलियारे टूट चुके हैं. फसल कटाई का समय अक्सर हाथियों के प्रवास के समय से मेल खाता है, जिससे हमारे गरीब लोगों और इस महान जीव के बीच संघर्ष उत्पन्न होता है. झारखंड के लोगों का जीवन प्रकृति और उसके संरक्षण के साथ अटूट रूप से जुड़ा है, किन्तु झारखंड भी मानव- वन्यप्राणी संघर्ष के वैश्विक रुझान से अछूता नहीं है और हम अपने तरीके से इससे निपट भी रहे हैं. इसे भी पढ़ें -18-20">https://lagatar.in/a-herd-of-elephants-reached-near-ranchi-lohardaga-four-lane-vehicular-traffic-was-disrupted-for-hours/">18-20हाथियों का झुंड रांची-लोहरदगा फोरलेन के समीप पहुंचा, घंटों वाहनों का आवागमन बाधित रहा [wpse_comments_template]
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