- 100 से अधिक प्रतिभागियों ने ली नशामुक्ति की शपथ
Ranchi : झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) द्वारा नशा मुक्त युवा, विकसित भारत–संकल्प अभियान के तहत नशा मुक्त भारत शपथ (Anti-Drug Pledge) कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सारंग मेढेकर के नेतृत्व व मार्गदर्शन में संपन्न हुआ .इसका उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें स्वस्थ, जिम्मेदार और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था.
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाइव संबोधन के सामूहिक प्रसारण से हुई.विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री का संबोधन सुना.अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है.
उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने, दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा विकसित भारत-2047 के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया.उन्होंने कहा कि स्वस्थ युवा ही एक मजबूत और विकसित भारत की नींव हैं.
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद विश्वविद्यालय के 100 से अधिक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों व कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से नशा मुक्त भारत शपथ ली.सभी प्रतिभागियों ने स्वयं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने, अपने मित्रों व परिवार के सदस्यों को भी नशे से बचने के लिए प्रेरित करने तथा समाज में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया.
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि नशा युवाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, करियर और पारिवारिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है.इसलिए सभी को मिलकर नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में कार्य करना चाहिए.कार्यक्रम के दौरान युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है का संदेश भी दिया गया और कहा गया कि नशामुक्त युवा ही विकसित भारत के लक्ष्य को साकार कर सकते हैं.
कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वय एनएसएस समन्वयक डॉ. हृषिकेश महतो तथा एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. रत्नेश कुमार मिश्रा ने किया.इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं एनएसएस स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी रही.
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया.विश्वविद्यालय की ओर से इसे युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी, सकारात्मक सोच और राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया.
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