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Education News : DSPMU में पीएचडी दाखिला रुका, नए रेगुलेशन के इंतजार में अटकी प्रक्रिया

झारखंड की खबरें

Ranchi : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) में पीएचडी में नामांकन पिछले 17 महीनों से बंद है. इसकी वजह नए पीएचडी रेगुलेशन का लागू नहीं होना है. विश्वविद्यालय ने पुरानी नियमावली समाप्त कर दी है, लेकिन नई नियमावली अभी तक लागू नहीं की गई है. ऐसे में पीएचडी में दाखिले की पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी है.

 

 

विश्वविद्यालय में रिसर्च गाइड उपलब्ध हैं और विभिन्न विभागों में करीब 100 पीएचडी सीटें भी खाली हैं.इसके बावजूद छात्र प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं. इसका सबसे अधिक असर शोध करने के इच्छुक छात्रों और यूजीसी नेट-जेआरएफ (JRF) पास अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है.

 

विश्वविद्यालय प्रशासन ने यूजीसी के पीएचडी रेगुलेशन-2022 के अनुसार नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. इस पर कुलपति प्रो. राजीव मनोहर की अध्यक्षता में चर्चा भी हो चुकी है.अब इस ड्राफ्ट को एकेडमिक काउंसिल की मंजूरी मिलनी है. इसके बाद इसे उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग और राजभवन भेजा जाएगा. वहां से स्वीकृति मिलने के बाद ही नया रेगुलेशन लागू होगा और पीएचडी में नामांकन शुरू हो सकेगा.

 

डीएसपीएमयू बनने के बाद विश्वविद्यालय में यूजीसी रेगुलेशन-2016 के आधार पर पीएचडी रेगुलेशन-2018 लागू किया गया था. बाद में यूजीसी ने 2022 में नया रेगुलेशन जारी किया, जिसके अनुसार विश्वविद्यालयों को नई नियमावली बनानी थी. लेकिन डीएसपीएमयू ने नया रेगुलेशन लागू होने से पहले ही पुराना रेगुलेशन समाप्त कर दिया. इसी कारण फिलहाल पीएचडी प्रवेश के लिए कोई वैध नियमावली नहीं है.

 

कुलपति प्रो. राजीव मनोहर ने कहा कि यूजीसी-2022 के अनुसार ड्राफ्ट तैयार है. उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से नया विश्वविद्यालय परिनियम (स्टैच्यूट) आने की सूचना मिली है. परिनियम मिलने के बाद पीएचडी में दाखिले की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

 

विश्वविद्यालय के कई शिक्षकों का कहना है कि नया रेगुलेशन लागू होने के बाद ही पुराने नियम को समाप्त किया जाना चाहिए था. उनका कहना है कि राज्य के अन्य विश्वविद्यालय अभी भी पुराने रेगुलेशन के तहत पीएचडी में दाखिला ले रहे हैं.

 

पीएचडी में दाखिला नहीं होने का सबसे ज्यादा नुकसान जेआरएफ अभ्यर्थियों को हो रहा है. पीएचडी में नामांकन के बाद उन्हें हर महीने करीब 30 हजार रुपये की फेलोशिप मिलती है. पिछले कई महीनों से प्रवेश प्रक्रिया बंद रहने के कारण वे इस फेलोशिप से भी वंचित हैं, जिससे उनका शोध कार्य और करियर प्रभावित हो रहा है. 

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