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Jamtara News: स्कूल में काम कराने पहुंचे शिक्षा पदाधिकारी से बदसलूकी, दो पारा शिक्षकों पर FIR

Jamtara News: बीईईओ सर्किल मरांडी के अनुसार, जगवाडीह विद्यालय में वह सरकारी कार्य के सिलसिले में पहुंचे थे. उनका आरोप है कि नामजद पारा शिक्षकों ने एकजुट होकर दूसरे शिक्षक को विद्यालय में योगदान करने से रोकने का प्रयास किया और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई.
 
जगवाडीह विद्यालय

Jamtara News: उत्क्रमित मध्य विद्यालय जगवाडीह में सरकारी काम कराने पहुंचे शिक्षा विभाग के पदाधिकारी को कथित तौर पर विरोध और धमकी का सामना करना पड़ा. मामला इतना बढ़ा कि नारायणपुर थाना में दो पारा शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो गई. अब स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ सरकारी काम, शिक्षक योगदान, गायब सामान और अधूरे भवन का हिसाब भी जांच के दायरे में आ गया है.

 

प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) सर्किल मरांडी के आवेदन पर नारायणपुर थाना में कांड संख्या 178/2026 दर्ज किया गया है. मामले में पारा शिक्षक मो. फारुका अंसारी और मो. नौशाद अंसारी को नामजद आरोपी बनाया गया है. पुलिस ने बीएनएस की धारा 221, 224, 316, 351(3) एवं 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया है. मामले के अनुसंधान की जिम्मेदारी एएसआई अजय कुमार को सौंपी गई है.

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बीईईओ सर्किल मरांडी के अनुसार, वह जगवाडीह विद्यालय में सरकारी कार्य के सिलसिले में पहुंचे थे. उनका आरोप है कि नामजद पारा शिक्षकों ने एकजुट होकर दूसरे शिक्षक को विद्यालय में योगदान करने से रोकने का प्रयास किया और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई. विरोध करने के दौरान उन्हें धमकी भी दी गई. बीईईओ का कहना है कि उन्हें जान से मारने की धमकी तक दी गई.

 

मामले ने एक और सवाल खड़ा कर दिया है. बीईईओ के अनुसार विद्यालय से सरकारी सामान भी गायब है. इसमें बर्तन, कुर्सी समेत अन्य सामग्री शामिल होने की बात कही गई है. ऐसे में अब पुलिस और विभागीय जांच में यह भी स्पष्ट होना है कि विद्यालय की सामग्री आखिर कहां गई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है.

 

बीईईओ ने एक विद्यालय भवन के निर्माण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि भवन का निर्माण आधा-अधूरा छोड़ दिया गया और निर्माण के लिए मिली राशि के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल है. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.

 

जगवाडीह विद्यालय का विवाद अब केवल दो शिक्षकों के बीच योगदान के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है. एक तरफ सरकारी कार्य में बाधा और धमकी का मामला प्राथमिकी तक पहुंच गया है, तो दूसरी तरफ विद्यालय की सामग्री गायब होने और भवन निर्माण में कथित अनियमितता के आरोप भी सामने आए हैं. यानी जिस स्कूल में बच्चों को किताब-कॉपी और पाठ पढ़ना चाहिए, वहां फिलहाल विभाग और पुलिस को सरकारी सामान, योगदान और निर्माण का हिसाब-किताब खंगालना पड़ रहा है.

 

पुलिस का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल दोनों नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

 

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