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RU में शिक्षा व्यवस्था चरमराई, NSUI का 13 अप्रैल को ‘छात्र आक्रोश आंदोलन’ का ऐलान

झारखंड के रांची विश्वविद्यालय और इसके अंतर्गत आने वाले लोहरदगा, रांची, खूंटी, गुमला एवं सिमडेगा जिलों के कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने मोर्चा खोल दिया है.
 

Ranchi : झारखंड के रांची विश्वविद्यालय और इसके अंतर्गत आने वाले लोहरदगा, रांची, खूंटी, गुमला एवं सिमडेगा जिलों के कॉलेजों में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने मोर्चा खोल दिया है.

 

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार को चेतावनी दी कि यदि छात्रों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो राज्यव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा.प्रेस वार्ता में NSUI ने विश्वविद्यालय की बदहाल व्यवस्था को लेकर 11 प्रमुख बिंदुओं पर गंभीर सवाल उठाए. 

 


संगठन के अनुसार 

 

1. शैक्षणिक सत्र पूरी तरह से पटरी से उतर चुके हैं; 2022-26 सत्र के छात्र अभी भी दूसरे सेमेस्टर में हैं.


2. कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी, 700-800 छात्रों पर एक प्रोफेसर का बोझ.


3. यूजीसी के निर्धारित 1:40 शिक्षक-छात्र अनुपात का पालन नहीं.


4. कक्षाओं में सभी विषयों की नियमित पढ़ाई का अभाव.


5. एक-दो अंकों से हजारों विद्यार्थियों को बार-बार अनुत्तीर्ण किया जाना.


6. कॉपियों के मूल्यांकन का कार्य निजी कंपनियों को सौंपे जाने से अनियमितताएं.


7. मेधावी छात्रों को भी 1-2 अंक देकर फेल करने के आरोप.


8. पुनर्निरीक्षण (Recheck) प्रक्रिया का जटिल और महंगा होना.


9. पीएचडी प्रवेश परीक्षा के नाम पर शुल्क लेने के बावजूद परीक्षा आयोजित नहीं होना.


10. विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति एवं कर्मचारियों की भारी कमी.


11. पिछले 9 वर्षों से छात्र संघ चुनाव नहीं होना, जिससे छात्रों का प्रतिनिधित्व समाप्त.

 

NSUI का कहना है कि इन समस्याओं के कारण छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है.

 

आंदोलन की चेतावनी


संगठन ने घोषणा की है कि 8 अप्रैल को विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्यपाल को अल्टीमेटम ज्ञापन सौंपा जाएगा. यदि इसके बावजूद कोई ठोस पहल नहीं होती है, तो 13 अप्रैल को रांची विश्वविद्यालय के समीप ‘छात्र आक्रोश आंदोलन’ आयोजित किया जाएगा, जिसमें हजारों छात्रों के शामिल होने की संभावना है. संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार और राज्यपाल ने संज्ञान नहीं लिया, तो पूरे झारखंड में आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

 

 

 

 


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