Ranchi/Bokaro : बोकारो पुलिस में जिस दारोगा उपेंद्र सिंह के नाम पर 20 महीने में 3.15 करोड़ रुपये की निकासी की गई है, वो वर्ष 2016 में ही रिटायर हो चुके हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिला पुलिस कार्यालय के बड़ा बाबू, डीडीओ (डीएसपी मुख्यालय) और ट्रेजरी ऑफिसर क्या कर रहे थे? उनकी पकड़ में यह मामला क्यों नहीं आया?
उल्लेखनीय है कि दारोगा के वेतन मद से 3.15 करोड़ रुपये की निकासी करने के मामले में बोकारो पुलिस के अकाउंटेंट को हिरासत में लिया गया है. जिस अकाउंटेंट को हिरासत में लिया गया है, उसका नाम कौशल किशोर पांडेय है. अभी मामले की जांच जारी है. 20 महीनों में दारोगा उपेंद्र सिंह के वेतन मद के नाम पर निकासी की गई थी.
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बता दें कि महालेखाकार ने इस गड़बड़ी को उजागर करते हुए राज्य सरकार के वित्त सचिव को पत्र लिखकर जानकारी दी थी. इससे संबंधित खबरें मीडिया में आने के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मामले की जांच का आदेश दिया है.
उधर, जिला प्रशासन ने इस मामले की जांच की. जांच के बाद जिला प्रशासन ने फर्जी निकासी, गबन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई. सोमवार की रात सात बजे अकाउंटेंट कौशल किशोर पांडेय को पूछताछ के लिए बुलाया गया. रात भर हिरासत में रखने के बाद मंगलवार की सुबह उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
जिला में जो सिस्टम है, उसके मुताबिक जिला पुलिस के पैसे निकासी की अथॉरिटी (निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी) जिला के एसपी होती है. वह अपनी अथॉरिटी किसी डीएसपी रैंक के अफसर, जो अकाउंट पास होते हैं, उन्हें देते हैं. बोकारो जिला में डीएसपी मुख्यालय अनिमेष गुप्ता डीडीओ हैं.
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