सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि देश लोकतंत्र की बुनियाद पर खड़ा है, जहां मतदान एक महत्वपूर्ण अधिकार और उत्सव होता है. उन्होंने चुनाव आयोग के नारे नो वोटर्स लेफ्ट बिहाइंड पर सवाल उठाते हुए कहा कि बंगाल में आयोग का कामकाज पुराने दौर की गड़बड़ियों जैसा नजर आ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने भाजपा के साथ मिलकर मतदाताओं का अधिकार छीनने का काम किया है.
उन्होंने बताया कि बंगाल में लॉजिकल डिस्पेंसरी के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. उनके अनुसार, करीब 27 लाख लोगों को वोट देने से वंचित कर दिया गया है और अब उन्हें अपना अधिकार साबित करने के लिए ट्रिब्यूनल का सहारा लेना पड़ रहा है.
भट्टाचार्य ने कहा कि यह प्रक्रिया आम लोगों के लिए बेहद कठिन है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दक्षिण 24 परगना के जोका में ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं, जहां दूर-दराज के इलाकों से लोगों को जाना पड़ रहा है. उन्होंने इसे न केवल मताधिकार का हनन बल्कि नागरिकता पर सवाल खड़ा करने वाला कदम बताया.
उन्होंने चुनाव आयोग के सोशल मीडिया हैंडल की भाषा पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह किसी सरकारी संस्था की बजाय किसी राजनीतिक दल की तरह लगती है. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हो रहा है.
असम चुनाव के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वहां पार्टी के पक्ष में माहौल बन रहा है. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन ने कम समय में लोगों को संगठित किया है और उनके अधिकारों के लिए काम किया है. उन्होंने दावा किया कि असम में पार्टी कई सीटों पर मजबूत स्थिति में है.
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