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23 साल बीत जाने के बाद भी फर्जी नियुक्ति मामले में अब तक पूरी नहीं हुई जांच

बिहार में 10 हजार फर्जी नियुक्ति वालों की नौकरी हुई खत्म, झारखंड में अब तक नहीं हुई कार्रवाई हजारीबाग में 441 स्वास्थ्य कर्मचारियों की हुई थी फर्जी नियुक्ति Gaurav Prakash Hazaribagh : हजारीबाग के स्वास्थ्य विभाग में फर्जी नियुक्ति का मामला कोई नया नहीं है. इसकी जड़ें बहुत दूर तक फैली हुई हैं. उसी में एक प्रेम साहू पर अब कार्रवाई करने की तैयारी चल रही है. 17 मई 2022 को हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल से फर्जी डॉक्टर राम बाबू के नाम का खुलासा हुआ था. वह डेढ़ साल से नौकरी कर रहे थे.

10 हजार फर्जी बहाल कर्मियों में 3000 हो चुके हैं रिटायर्ड

संयुक्त झारखंड-बिहार में 1980 से 90 के बीच में 20,000 से अधिक फर्जी नियुक्ति स्वास्थ्य विभाग में हुई. इसके सूत्रधार स्वास्थ्य विभाग के वरीय पदाधिकारी थे. अलग राज्य बनने के बाद 10 हजार कर्मी झारखंड कैडर के लिए भेज दिए गए. जैसे ही बात प्रकाश में आयी बिहार सरकार ने कार्रवाई करते हुए सभी 10 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया. लेकिन झारखंड सरकार ने अब तक 10 हजार कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं की है. इन 10 हजार कर्मचारियों में 441 कर्मचारी हजारीबाग में सेवा दे रहे हैं. इन 10 हजार कर्मचारियों में लगभग 3000 कर्मचारी रिटायर्ड हो गए हैं और कुछ अब सेवानिवृत्ति की कगार पर पहुंच गए हैं. इन सभी की बहाली चतुर्थ वर्ग के लिए की गई थी. समय बीतने के साथ-साथ प्रमोशन होता चला गया और अब ये कार्यालय के बड़े बाबू और लिपिक जैसे पद पर काम कर रहे हैं. जानकारी यह भी है कि इनमें से कई ऐसे कर्मी हैं जिनका दस्तावेज ही गायब हो चुका है. विभाग के पास भी इनका रिकॉर्ड नहीं है. लेकिन यह मोटी रकम फर्जी नियुक्ति करके प्राप्त कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें : बड़ी">https://lagatar.in/big-news-the-clerk-of-the-regional-deputy-directors-office-turned-out-to-be-fake/">बड़ी

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फर्जी नौकरी वालों पर सरकार खर्च कर चुकी है 900 करोड़ रुपए

फर्जी तरीके से नौकरी प्राप्त कर 441 कर्मचारी करोड़ों रुपए सरकार से ले चुके हैं. उनके वेतन को जोड़ा जाए, तो 900 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. प्रत्येक कर्मचारी को दो करोड़ रुपए के आसपास वेतन भी भुगतान किया जा चुका है. ऐसे में यह समझा जा सकता है कि कितनी बड़ी राशि वैसे लोगों को दी गई, जो उस पद के लायक ही नहीं हैं.

खुलने लगी परत-दर-परत पोल

आज यह पुरानी बात इसलिए परत-दर-परत खुल रही है, क्योंकि प्रेम साहू को फर्जी नियुक्ति के आधार पर कार्रवाई करने की अनुशंसा विभाग ने की है. पत्राचार कर प्रपत्र क गठित करने का भी निर्देश निर्गत किया गया है. दूसरी ओर अब उन्हें बर्खास्त भी किया जाएगा. यही नहीं हजारीबाग सिविल सर्जन कार्यालय प्राथिमकी कराने की भी तैयारी कर रहा है. प्रेम साहू भी उसी काल का कर्मी है, जिसे पहले चालक के पद पर नियुक्त किया गया था और आज वह लिपिक बन चुका है. 31 साल तक फर्जी नियुक्ति के आधार पर उन्होंने सरकार से वह सारी सुविधाएं लीं, जिसके वह हकदार नहीं थे. इसे भी पढ़ें : ईडी">https://lagatar.in/revealed-in-ed-investigation-illegal-mining-work-is-not-stopping-in-sahebganj-even-after-action/">ईडी

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पांच बार बनी जांच कमेटी, लेकिन ठंड बस्ते में रही फाइल

राज्य गठन के 23 साल बीत जाने के बाद भी पांच बार जांच कमेटी बनाई गई. जांच की भी गई, लेकिन बड़ा बाबू और अधिकारी फाइल दबाकर बैठ गए. अगर फाइल आगे बढ़ती, तो बड़ा बवंडर हो सकता था. यही नहीं, जिन्होंने फर्जी तरीके से नियुक्ति की, उन पर भी कार्रवाई हो सकती थी. जिस वक्त यह फर्जी बहाली की गई, उस वक्त के अधिकारी आज रिटायर्ड भी हो चुके हैं. अगर कोई होंगे भी, तो वह बहुत बड़े पद पर पहुंच चुके होंगे. इस कारण भी यह पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया है.

तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. केवी शर्मा और डॉ. डी नारायण की भूमिका संदेहास्पद

वर्ष 2020 की रिपोर्ट में बताया गया कि हजारीबाग समेत कई जिले के चिकित्सा पदाधिकारी नियमों को ताक पर रखकर बहाली की. लोक सेवकों ने साजिश कर अपने लाभ को देखते हुए पद का दुरुपयोग किया. फोर्थ और थर्ड ग्रेड के लिए नियुक्ति के लिए आरक्षण रोस्टर, विज्ञापन, साक्षात्कार आदि के नियमों का भी पालन नहीं किया. बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतते हुए बहाली की गई. उस वक्त हजारीबाग के सिविल सर्जन डॉक्टर केवी शर्मा थे. उनकी संलिप्तता के साथ डॉक्टर डी. नारायण की भी की भूमिका संदेहास्पद थी. बहरहाल फिर से फर्जी नियुक्ति का मामला गरमाता जा रहा है. एक जालसाज पर कार्रवाई होने के लिए मुहर लग गई है. आने वाले दिनों में यह उम्मीद लगाई जा रही है कि कुछ और जालसाजों पर हजारीबाग में गाज गिर सकती है. इसे भी पढ़ें : खुद">https://lagatar.in/voter-and-uid-card-is-not-asking-for-self-identity-and-villagers/">खुद

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