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7 माह बाद भी जल कार्य, जल अधिभार और संयोजन नियमावली नहीं हुई लागू

बीजेपी के प्रभाव वाले निकायों में फाइलों से नहीं निकल पा रहे सरकार के जारी निर्देश Ranchi : झारखंड के नगर निकायों में सरकार की ओर से जारी निर्देश फाइलों से निकल नहीं पा रहे हैं. सरकार और निकायों में मतभेद के कारण शहरी क्षेत्रों के विकास कार्य बाधित हो रहे हैं. यही वजह है कि सरकार ने झारखंड नगरपालिका अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर निकाय चुनाव को दलगत आधार पर नहीं कराने का फैसला लिया है. 31 दिसंबर 2020 को नगर निकायों को नई वाटर सप्लाई और वाटर चार्ज नियमावली लागू करने का निर्देश दिया गया था. रांची समेत अधिकांश निकायों में 7 महीने बाद भी यह लागू नहीं हो सका है. जिन निकायों में बीजेपी के मेयर और डिप्टी मेयर हैं वहां इस नई नियमावली का काफी विरोध हो रहा है. उनका कहना है कि नई वॉटर पॉलिसी अव्यवहारिक है. इसे भी पढ़ें - साकची">https://lagatar.in/sakchi-fish-trader-beaten-up-by-shopkeepers-accused-of-robbing-17000/122857/">साकची

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निकायों में लागू है पुरानी ही दर

सभी नगर निकायों में वाटर कनेक्शन की पुरानी दर ही ली जा रही है, जबकि 31 दिसंबर 2020 को नगर विकास विभाग की ओर से अधिसूचना जारी होते ही झारखंड नगरपालिका जल कार्य, जल अधिभार एवं जल संयोजन नियमावली 2020 प्रभावी हो गया है. सभी नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत और नगर परिषद को नई नियमावली लागू करनी थी. नई नियमावली में वाटर कनेक्शन का शुल्क चार कैटेगरी में निर्धारित किया गया है. इसे भी पढ़ें -Fortune">https://lagatar.in/fortune-global-list-reliance-out-of-top-100-list-worst-ranking-since-2017/122849/">Fortune

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निर्धारित की गई नई दर

उपभोक्ता बिल्डअप एरिया कनेक्शन फीस
आवासीय उपभोक्ता 1000 sqft 7000
  1001 से 3000 sqft 14000
  3001 से 5000 sqft 28000
  5000 sqft से ज्यादा 42000
सांस्थिक और सरकारी बिल्डअप एरिया 26 रुपये प्रति sqft वाणिज्यिक उपभोक्ता बिल्डअप एरिया 26 रुपये प्रति sqft औद्योगिक उपभोक्ता बिल्डअप एरिया 26 रुपये प्रति sqft

वाटर कनेक्शन और टैक्स को सुव्यवस्थित करने की योजना

नई नियमावली में वाटर कनेक्शन और वाटर टैक्स को सुव्यवस्थित करने की कोशिश की है. लगातार दो महीने तक मासिक बिल का भुगतान नहीं करने पर उपभोक्ता से राशि का 1.5 फीसदी ब्याज हर महीने वसूलने का नियम बनाया गया है. लगातार 6 महीने तक बिल का भुगतान नहीं करने पर पानी का कनेक्शन काटने और बकाया राशि का दोगुना दर वसूला जाएगा. वहीं अवैध कनेक्शन पाये जाने पर घरेलु उपभोक्ताओं से तीन किस्त में 4000 रुपये और गैर घरेलु उपभोक्ताओं से तीन किस्त में 10000 रुपये वसूलने का नियम बनाया गया है. अगर उपभोक्ता एकमुश्त पूरी राशि जमा करता है तो उसे 10 फीसदी छूट दी जाएगी. इसे भी पढ़ें -चाट-पापड़ी">https://lagatar.in/chaat-papri-bill-tmc-mp-took-a-jibe-at-the-passage-of-a-bill-in-12-seven-minutes-in-10-days/122841/">चाट-पापड़ी

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अवैध कनेक्शन, पानी की बर्बादी रोकने की कोशिश

नई नियमावली में वाटर टैक्स से निकायों का राजस्व बढ़ाने, अवैध कनेक्शन खत्म करने और पानी की बर्बादी रोकने की योजना है. इस नियमावली के लागू होने से वाटर कनेक्शन और सप्लाई की स्थिति सुधर सकती है. नियमित जल आपूर्ति के साथ-साथ विभाग की जिम्मेवारी भी तय की गई है, लेकिन विभाग और नगर निकायों के मतभेद के कारण नई नियमावली 7 महीने बाद भी लागू नहीं पाई है.

अधिनियम में संशोधन के बाद स्थिति में हो सकता है सुधार

गौरतलब है 2018 में 34 निकायों में हुए चुनाव में 20 निकायों में बीजेपी के मेयर और डिप्टी मेयर जीते थे. इन निकायों में कई योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है. 14 नगर निकायों का चुनाव पेंडिंग है. इनमें से 8 का कार्यकाल मई में ही पूरा हो चुका है. नगरपालिका अधिनियम में संशोधन के पास होने के बाद दलगत आधार पर नगर निकायों का चुनाव खत्म हो जाएगा. इससे निकायों और सरकार के बीच मतभेद खत्म होगा औऱ शहरी क्षेत्रों में विकास की गाड़ी और तेज दौड़ेगी. इसे भी पढ़ें -धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-judge-murder-case-hc-angry-over-sit-status-report/122846/">धनबाद

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