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खतियान बिल वापस होने से हर झारखंडी आहत- झामुमो

  • राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 31 (बी) को नहीं पढ़ा, हां, अन्य अनुच्छेद को जरूर पढ़ लिया.
  • अनुच्छेद 31 (बी) राज्यों को अधिकार देता है, इसे ध्यान में रख राजभवन को इसे भारतीय संसद को भेजा जाना चाहिए.
  • जब-जब हेमंत सरकार ने आदिवासी-मूलवासी के हित में कोई पहल की, तब-तब झारखंड विरोधी बाहरी तत्व जनता पार्टी (बीजेपी) सक्रिय होती है.
Ranchi : 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति विधेयक को लौटाने के बाद झामुमो भी राजभवन और भाजपा पर हमलावर हो गया है. पार्टी ने राज्यपाल रमेश बैस से पूछा है कि पांचवी अनुसूची में आने वाले झारखंड की रक्षा अगर राजभवन नहीं करेगा, तो कौन करेगा. वहीं, भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा, जिस विधेयक से राज्य के मूलवासी-आदिवासी की भावना जुड़ी हुई है, उसके लिए राज्य सरकार ने पहल की, तभी से झारखंड विरोधी शक्तियां (भाजपा) हावी हो गई. पार्टी मुख्यालय में सोमवार को मीडिया से बातचीत में झामुमो के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, राज्यपाल ने तर्क दिया कि राज्य सरकार के पास संविधान की अनुच्छेद 16 (3) का कोई अधिकार नहीं है. यह अधिकार संसद को है. झारखंड सरकार ने तो विधेयक में इस बात का जिक्र करते हुए अनुच्छेद 31 (बी) का स्पष्ट उल्लेख किया था. अनुच्छेद के तहत कहा था कि ऐसे विषय को संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल कराने के लिए राज्य सरकार संसद को विचार के लिए भेज सकती है. लेकिन राज्यपाल ने इसे वापस कर दिया. राज्यपाल ने अनुच्छेद 31 (बी) को तो नहीं पढ़ा, हां, उन्होंने अन्य अनुच्छेदों को जरूर पढ़ लिया. इसे पढ़ें- सूबे">https://lagatar.in/crisis-on-health-state-colleague-banna-gupta-is-not-worried-about-workers-people-are-affected-by-strike/">सूबे

के स्वास्थ पर संकटः सहकर्मी बन्ना गुप्ता को नहीं है कर्मियों की चिंता, हड़ताल से त्रस्त हुई जनता

भाजपा एक बार बोल कर तो देखे कि झारखंड में खतियान नहीं लागू हो सकता

सुप्रियो ने कहा, झारखंड में भाजपा यानी बीजेपी का शाब्दिक अर्थ बाहरी जनता पार्टी हो गया है. अगर भाजपा नेताओं को खतियान का विरोध करना है तो खुल कर वे क्यों नहीं करते. एक बार वे बोल कर तो देखें कि झारखंड में खतियान नहीं लागू हो सकता. उन्होने कहा कि राज्यपाल विधानसभा के संरक्षक भी हैं. अगर वही विधानसभा अपने संरक्षक को कहे कि संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल कराने के लिए वे इसे संसद को भेजें, तो उन्हें संविधान के अनुच्छेद 12, 3. 14 17, 35 याद आ जाती है. लेकिन उस गिनती में राज्यपाल को 31 भी याद करनी चाहिए, जिसका जिक्र विधेयक में राज्य सरकार ने किया था. राज्यपाल के इस पहल से आज पूरे झारखंड के लोग आहत हैं. इसे भी पढ़ें-  शाम">https://lagatar.in/evening-news-diary-30-jan-2023-jhar-news-updates/">शाम

की न्यूज डायरी।।30 JAN।।बिल वापस होने से घबराएंगे नहीं-हेमंत।।NOC के चक्कर में लटकी योजनाएं।।मरना कबूल,बीजेपी में नहीं जाएंगे-नीतीश।।हमारे पुरखों ने दी कुर्बानी-राहुल।।पाकःमस्जिद में ब्लास्ट, 28 मरे।।समेत कई खबरें और वीडियो

सरकार कानूनी पहलुओं को सुलझाएगी, झामुमो भाजपा की पोल खोलेगी

उन्होंने कहा, विधेयक को लेकर राज्य सरकार कानून के जरिये काम करेगी. विधेयक को दोबारा राज्यपाल के पास भेजा जाएगा. वहीं एक राजनीतिक पार्टी होने के नाते झामुमो भाजपा के कामों को जनता के बीच लेकर जाएगी. वे लोगों को बताएगी कि कैसे भाजपा ने यहां के लोगों के अधिकारों को कानून बनाने से रोक रही है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात में आदिवासी की बात करते हैं. 15 नवंबर को आदिवासी गौरव दिवस मानते हैं. लेकिन आदिवासी-मूलवासी के हितों के अधिकारों पर पेंच फंसाया जाता है. [wpse_comments_template]

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