- 262 मामलों में नियमों को ताक पर रखकर हुई जांच, पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
Ranchi : झारखंड पुलिस की हिरासत में हो रही मौतों ने राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2018 से 2026 तक राज्य में कुल 427 लोगों की मौत पुलिस और न्यायिक हिरासत के दौरान हुई है. यह आंकड़ा अपने आप में बेहद चिंताजनक है और झारखंड पुलिस की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 427 मामलों में से 262 मामलों की जांच तय कानूनी प्रक्रिया से हटकर कराई गई. ऐसे गंभीर मामलों में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही जरूरी मानी जाती है, लेकिन बड़ी संख्या में नियमों को नजरअंदाज किए जाने से झारखंड पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है.
आंकड़ों के मुताबिक 225 मामलों में न्यायिक जांच दर्ज की गई, जबकि 262 मामलों में कार्यपालक स्तर पर जांच कराई गई. दोनों आंकड़ों में अंतर ने भी रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इससे यह बहस तेज हो गई है कि आखिर हिरासत में लगातार हो रही मौतों की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो पा रही है.
राज्य में पुलिस हिरासत के भीतर मौत के बढ़ते मामलों ने आम लोगों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है. मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों का कहना है कि हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता और जवाबदेही की सीधी परीक्षा होती है.
झारखंड पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हिरासत में लगातार हो रही मौतों पर जवाबदेही कौन तय करेगा और व्यवस्था में पारदर्शिता कब दिखाई देगी. लगातार सामने आ रहे आंकड़ों ने पुलिस व्यवस्था पर जनता का भरोसा और चिंता दोनों बढ़ा दी है.
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