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EXCLUSIVE :  झारखंड में बढ़ते अपराध पर पुलिस मुख्यालय सख्त, क्राइम कंट्रोल नहीं हुआ तो नपेंगे थानेदार

झारखंड में लगातार बढ़ रहे अपराध और पुलिसिंग की गुणवत्ता को लेकर पुलिस मुख्यालय अब पूरी तरह एक्शन मोड में है. सूत्रों के मुताबिक, अब जिस थाना क्षेत्र में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ेंगी, वहां के थाना प्रभारी सीधे कार्रवाई के दायरे में आएंगे. खराब प्रदर्शन करने वाले थानेदारों की पहचान कर उन्हें लाइन हाजिर किया जाएगा.
 
झारखंड की खबरें
  • खराब प्रदर्शन वाले थानेदार होंगे लाइन हाजिर

Ranchi :  झारखंड में लगातार बढ़ रहे अपराध और पुलिसिंग की गुणवत्ता को लेकर पुलिस मुख्यालय अब पूरी तरह एक्शन मोड में है. सूत्रों के मुताबिक, अब जिस थाना क्षेत्र में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ेंगी, वहां के थाना प्रभारी सीधे कार्रवाई के दायरे में आएंगे. खराब प्रदर्शन करने वाले थानेदारों की पहचान कर उन्हें लाइन हाजिर किया जाएगा.

 

सूत्रों के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को अपराध नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है. अब हर महीने अपराध की समीक्षा होगी और प्रत्येक थाने का प्रदर्शन रिपोर्ट तैयार किया जाएगा. जिस थाना क्षेत्र में अपराध अधिक होंगे या अपराध नियंत्रण में लापरवाही मिलेगी, उस थानेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

 

 

केवल अपराध नियंत्रण ही नहीं, बल्कि तकनीकी कार्यों की भी कड़ी निगरानी होगी. एफआईआर से जुड़ी जानकारी समय पर CCTNS पर अपलोड करना, केस की नियमित अपडेटिंग और पुलिस पोर्टल पर सही जानकारी दर्ज करना अनिवार्य होगा. यदि किसी थाना से गलत या भ्रामक सूचना भेजी जाती है या रिकॉर्ड अपडेट नहीं पाया जाता है, तो संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जाएगी.

 

सूत्र बताते हैं कि एसपी हर महीने होने वाली क्राइम मीटिंग में सभी थानों की समीक्षा करेंगे. एसपी की रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस मुख्यालय आगे की कार्रवाई करेगा. लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर करने से लेकर अन्य प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है.

 

सूत्रों के अनुसार, यदि किसी जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) भी अपराध नियंत्रण की समीक्षा, थानों की मॉनिटरिंग या मुख्यालय के निर्देशों के पालन में लापरवाही बरतते हैं, तो उनके खिलाफ भी पुलिस मुख्यालय स्तर से कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किया जाएगा.


गौरतलब है कि झारखंड में करीब 600 से अधिक थाने हैं. ऐसे में पुलिस मुख्यालय की यह नई मॉनिटरिंग व्यवस्था राज्य की पुलिसिंग को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. अब अपराध पर नियंत्रण नहीं होने या रिकॉर्ड प्रबंधन में लापरवाही बरतने वाले थानेदारों के लिए बच निकलना आसान नहीं होगा.

 

 

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