परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक मामले की सीएम कराएं जांच : बाबूलाल मरांडी
22 जिलों में सुखाड़ की स्थिति
झारखंड के कुल क्षेत्रफल का 80 फीसदी कृषि ग्रामीण क्षेत्र में होती है. झारखंड में कृषि योग्य भूमि लगभग 28 से 30 हेक्टेयर है. जिसमें 18 लाख हेक्टेयर में सिर्फ धान की खेती की जाती है. सरायकेला और लोहरदगा जिले को छोड़कर कमजोर मॉनसून की वजह से बाकि 22 जिलों में सुखाड़ की स्थिति बनी हुई है. लेकिन इसके बावजूद किसान एक उम्मीद के साथ खेतों में सिंचाई कर बिचड़ा बचाने की कोशिश में लगे हैं. लेकिन खेतों में पड़ें दरार से चिंता बढ़ी हुई है. किसान जुगन मुंडा का कहना है कि इस समय तक आधा बिचड़ों को खेत में लगा दिया जाता था. लेकिन इस बार बारिश नहीं होने की वजह से जो बिचड़े लगाए गये थे, वो भी खेत में पानी की कमी होने से सूखने लगे हैं. अगर बारिश नहीं होती है तो बचे-खुचे बिचड़े भी खत्म हो जाएंगे.alt="झारखंड में इंद्रदेव की बेरूखी से किसान मायूस, सूख रहे खेतों में लगे बिचड़े" width="600" height="400" /> वहीं किसान कार्तिक लोहरा का कहना है कि हर तरफ से सिर्फ किसान ही दोहरी मार झेलता है. इस वक्त तक जब रोपनी होनी चाहिए थी, तो बारिश के अभाव में धान का बिचड़ा खेतों में ही सूख रहा है. खेत में बिचड़ों की रोपि के वक्त ही इंद्र देवता किसानों से नाराज हो गए हैं, इसलिए खेत सूखे पड़े हैं. किसान सोमा उरांव का कहना है कि खेतों में पानी जमा होता तो वे धान की खेती में वे लग जाते. धान के बिचड़े तो तैयार हैं, लेकिन खेत में ही सुख रहे हैं. इसलिए धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं. सावन के पहले सप्ताह तक अगर बारिश हुई तो धान की खेती होगी और नहीं हुई तो किसान पूरी तरह बर्बाद हो जायेंगे.
बिचड़े को सिंचाई कर बचाएं किसान - वैज्ञानिक
[caption id="attachment_351270" align="aligncenter" width="600"]alt="डॉ रमेश कुमार//कृषि मौसम वैज्ञानिक बीएयू" width="600" height="400" /> डॉ रमेश कुमार, कृषि मौसम वैज्ञानिक बीएयू[/caption] राज्य में कमजोर मॉनसून को लेकर बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ रमेश कुमार ने समाधान बताया है. उन्होंने कहा कि सबसे पहले किसान खेतों में लगे बिचड़ों की सिंचाई करें ताकि उन्हें बचाया जा सके. जिससे मॉनसून में सुधार हुआ तो किसान तुरंत रोपाई कर सकें. साथ ही बताया कि जो किसान बारिश के अभाव में बिचड़ा तैयार नहीं पाए हैं,वैसे किसान भी धान की सीधी बुआई भी कर सकते हैं. 15 जुलाई तक बारिश होती है, तो धान की खेती अच्छी होने की उम्मीद है. क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि पहले मॉनसून कमजोर होता है और बाद में अच्छी बारिश होती है. इसलिए किसान भाई बिचड़ों को जितना हो सके बचाव करने की कोशिश करें. क्योंकि झारखंड में खरीफ की फैसल वर्षा आधारित होती है. इसे भी पढ़ें -रांची:">https://lagatar.in/ranchi-high-courts-instructions-to-adg-ssp-police-to-find-the-missing-file/">रांची:
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