यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य के अंचल कार्यालयों, निबंधन कार्यालयों, कृषि विभाग, कल्याण विभाग, आईटी परियोजनाओं और कई अन्य महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों में इन्हीं एजेंसियों के माध्यम से मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाता है. प्रमाण पत्र निर्गत करने, डाटा प्रबंधन, कार्यालय संचालन, राजस्व संबंधी कार्यों और जनसेवा से जुड़े अनेक संवेदनशील कार्य भी इन्हीं कर्मियों के भरोसे संचालित होते हैं.
मगर दूसरी ओर इन एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. विधानसभा से लेकर सड़क तक कर्मचारियों के वेतन, सेवा शर्तों और कथित कटौती को लेकर बहस होती रही है. कई संविदा कर्मियों और डाटा एंट्री ऑपरेटरों का आरोप रहा है कि सरकार से निर्धारित दर पर भुगतान मिलने के बावजूद एजेंसियां कर्मचारियों को अपेक्षाकृत कम वेतन देती हैं. सेवा शुल्क और अन्य मदों के नाम पर कटौती की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं.
विगत विधानसभा सत्र में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई जनप्रतिनिधियों ने मैनपावर एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे. जनप्रतिनिधियों का कहना था कि वर्षों से सरकारी कामकाज संभाल रहे कर्मियों को न तो पर्याप्त वेतन मिल रहा है और न ही नौकरी की सुरक्षा.
विडंबना यह है कि सरकारी व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ये कर्मचारी स्वयं असुरक्षा के माहौल में काम करते हैं. एजेंसियों की शर्तों के तहत उन्हें कभी भी हटाया जा सकता है. नौकरी जाने के डर से अधिकांश कर्मचारी खुलकर अपनी बात भी नहीं रख पाते.
JAP-IT के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार संबंधित एजेंसियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन एग्रीमेंट निष्पादित किया जाएगा. हालांकि यह विस्तार पूरी तरह सशर्त है. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी एजेंसियों को एक माह के भीतर बैंक गारंटी (BG) अथवा परफॉर्मेंस बैंक गारंटी (PBG) जमा करनी होगी.
साथ ही किसी एजेंसी के खिलाफ शिकायत, जांच या अनियमितता के आरोप सही पाए जाने पर विभाग को अनुबंध तत्काल समाप्त करने और कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा.
अवधि विस्तार पाने वाली 12 एजेंसियां
JAP-IT द्वारा जिन एजेंसियों को 31 जुलाई 2026 तक अवधि विस्तार दिया गया है, उनमें ब्लूम सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, एवरग्रीन सर्विसेज, एम-4 सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, एप्टैड टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, राजरतन कंसल्टेंसी एंड सर्विस प्राइवेट लिमिटेड, फ्रंटलाइन एक्स-सर्विसमेन ब्यूरो, फ्रंटलाइन (एनसीआर) बिजनेस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, शिवा प्रोटेक्शन फोर्स प्राइवेट लिमिटेड, बलजीत डिटेक्टिव फोर्स, बिरसा सिक्योरिटी एंड सर्विस सेटलमेंट, रेडर सिक्योरिटी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड तथा कमांडो इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स शामिल हैं.
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