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FIBAC 2025 : RBI गवर्नर बोले-अब लक्ष्य ‘समृद्ध भारत’ का, मौद्रिक नीति और ऋण विस्तार पर है फोकस

गवर्नर मल्होत्रा ने देश के मजबूत आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे पास 695 अरब अमेरिकी डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार है, जो 11 महीने के व्यापारिक निर्यात को कवर करने के लिए पर्याप्त है. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की पीढ़ियों ने हमें एक 'स्वतंत्र भारत' दिया है, अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम एक 'समृद्ध भारत' के निर्माण के लिए काम करें.
 

Lagatar Desk :  देश का प्रमुख वार्षिक बैंकिंग सम्मेलन FIBAC 2025 मुंबई में आयोजित किया जा रहा है. इस प्रतिष्ठित आयोजन का संयुक्त रूप से संचालन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) द्वारा किया जा रहा है.

 

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वार्षिक बैंकिंग सम्मेलन को संबोधित किया और देश की आर्थिक स्थिरता, मौद्रिक नीति और भविष्य की विकास रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए. 

 

भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार

गवर्नर मल्होत्रा ने देश के मजबूत आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे पास 695 अरब अमेरिकी डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार है, जो 11 महीने के व्यापारिक निर्यात को कवर करने के लिए पर्याप्त है. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों की पीढ़ियों ने हमें एक 'स्वतंत्र भारत' दिया है, अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम एक 'समृद्ध भारत' के निर्माण के लिए काम करें.

 

मौद्रिक नीति और ऋण वृद्धि पर फोकस

गवर्नर मल्होत्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई आगे भी मूल्य स्थिरता और आर्थिक विकास के दोहरे लक्ष्यों को संतुलित करने के उद्देश्य से मौद्रिक नीति को जारी रखेगा. साथ ही उन्होंने बताया कि बैंक ऋण में वृद्धि के लिए नए उपायों पर विचार किया जा रहा है, जिससे देश की आर्थिक गति को और बल मिल सके.

 

वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की भूमिका

विश्व अर्थव्यवस्था में बढ़ती अस्थिरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अस्थिर वैश्विक आर्थिक माहौल में आगे बढ़ते हुए हमें विकास की सीमाओं को और आगे खिसकाना होगा. उन्होंने कहा कि भारत को अपनी नीतियों और नवाचार के जरिए वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हुए विकास की नई ऊंचाइयों को छूने की जरूरत है.

 

नियामक समीक्षा प्रकोष्ठ की स्थापना की जाएगी

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि नियामकीय पारदर्शिता और समसामयिकता बनाए रखने के उद्देश्य से एक प्रस्तावित नियामक समीक्षा प्रकोष्ठ (Regulatory Review Cell) की स्थापना की जाएगी, जो हर 5 से 7 वर्षों में सभी मौजूदा नियमों की समीक्षा करेगा. 

 

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