Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

कांके से शुरू हुआ फाइलेरिया मुक्त रांची अभियान, 5.57 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य

Ranchi : रांची जिले में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर मंगलवार से व्यापक स्तर पर अभियान की शुरुआत की गई. मंगलवार को जिला स्तरीय फाइलेरिया मुक्ति कार्यक्रम का शुभारंभ उप विकास आयुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने कांके स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय परिसर में किया. इस अवसर पर उन्होंने फाइलेरिया को गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बताते हुए आम लोगों से दवा सेवन में सहयोग की अपील की.

 

उप विकास आयुक्त ने बताया कि फाइलेरिया के विलोपन के लिए सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम 10 फरवरी से 25 फरवरी तक चलाया जाएगा. यह अभियान रांची जिले के चार प्रखंड राहे, सोनहातू, तमाड़ और कांके में संचालित किया जा रहा है. कार्यक्रम का उद्देश्य शेष बचे फाइलेरिया के मामलों को समाप्त कर जिले को पूरी तरह रोग मुक्त बनाना है.

 

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई. इस दौरान उप विकास आयुक्त, सिविल सर्जन रांची डॉ प्रभात कुमार सहित अन्य अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने स्वयं दवा का सेवन कर लोगों को संदेश दिया. विद्यालय की छात्राओं को भी दवा खिलाकर इसके सुरक्षित होने का भरोसा दिलाया गया. उप विकास आयुक्त ने कहा कि फाइलेरिया का इलाज नहीं है, लेकिन समय पर दवा लेकर इसे रोका जा सकता है. यह बीमारी व्यक्ति को शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी प्रभावित करती है, इसलिए दवा सेवन बेहद जरूरी है.

 

उन्होंने बताया कि जिले के 14 प्रखंडों में पहले ही फाइलेरिया को एलिमिनेट किया जा चुका है, जबकि शेष चार प्रखंडों में अभी 29 सक्रिय मामले पाए गए हैं. इन्हीं क्षेत्रों में विशेष अभियान के तहत दवा खिलाई जा रही है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार केवल दवा सेवन से ही इस बीमारी की रोकथाम संभव है.

 

सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने जानकारी दी कि हाथीपांव की बीमारी गंदे पानी में पनपने वाले मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होती है. यह बीमारी जानलेवा नहीं है, लेकिन जीवनभर की परेशानी बन सकती है. इसी कारण बचाव ही इसका एकमात्र उपाय है. उन्होंने बताया कि चार प्रखंडों में 619 बूथ बनाए गए हैं, जहां 1238 दवा प्रशासकों की देखरेख में लगभग 5,57,970 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है.

 

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि दवा खाली पेट नहीं लेनी है. दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाएगी. एक से दो वर्ष के बच्चों को केवल एल्बेंडाजोल की आधी गोली दी जाएगी.

 

कार्यक्रम के दौरान फाइलेरिया मुक्त झारखंड के निर्माण के लिए उपस्थित लोगों को शपथ दिलाई गई और जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. यह रथ गांव गांव जाकर लोगों को बीमारी के लक्षण, बचाव और दवा सेवन के प्रति जागरूक करेगा. कार्यक्रम का समापन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी कांके डॉ सीमा गुप्ता के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.

 

 


Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

 

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही